‘जस्टिस इज ड्यू’ : 24 पन्नों का सुसाइड नोट, 1 घंटे का वीडियो, मरने से पहले AI इंजीनियर अतुल ने बयां की अपनी दर्द भरी कहानी...

जौनपुर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के रहने वाले AI सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने अपने जीवन में उठे तूफानों से जूझते हुए आत्महत्या का रास्ता चुन लिया। बंगलूरू की एक निजी कंपनी में कार्यरत 34 वर्षीय अतुल सुभाष ने 24 पन्नों का सुसाइड नोट और डेढ़ घंटे का एक वीडियो संदेश छोड़ा, जिसमें उन्होंने शादी के बाद की कड़वाहट, कानूनी लड़ाईयों, और न्याय पाने में मिली असफलता की दर्द भरी कहानी बयान की है।
पारिवारिक तनाव और कानूनी जाल ने तोड़ा मनोबल
2019 में जौनपुर की निकिता सिंघानिया से शादी करने वाले अतुल ने अपने नोट में लिखा कि वैवाहिक जीवन में तनाव ने उनका जीवन दूभर कर दिया। पत्नी निकिता और उसके परिजनों द्वारा दहेज उत्पीड़न, हत्या की कोशिश, और अप्राकृतिक यौन संबंध जैसे 9 अलग-अलग मामलों में फंसाए जाने के बाद अतुल पूरी तरह से टूट गए।
उनके खिलाफ चल रहे केसों में दो साल के दौरान 120 से अधिक सुनवाई हुईं, जो उनके लिए मानसिक और आर्थिक रूप से अत्यंत कठिन साबित हुईं। उन्होंने लिखा कि कानूनी प्रक्रिया के दौरान जौनपुर के एक न्यायाधीश ने भी 5 लाख रुपये की रिश्वत मांगी।
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“मर जाना ही सही रास्ता है”
अतुल ने बताया कि उनकी पत्नी ने उनसे झगड़े के दौरान कहा था, "सब मरते हैं, तो तुम क्यों नहीं मर जाते?"। इस शब्द ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया। सुसाइड नोट में उन्होंने जज और उनकी पत्नी के व्यवहार को जिम्मेदार ठहराते हुए लिखा, "मर जाना ही इन सबका अंत है।"
जज का ठहाका और पति का दर्द
अतुल ने अपने सुसाइड नोट में जौनपुर की अदालत की एक सुनवाई का जिक्र करते हुए लिखा कि जब उन्होंने जज को बताया कि उनकी पत्नी ने उनके खिलाफ झूठे मामले दर्ज कराए हैं, तो जज ने इसे सामान्य घटना बताते हुए ठहाका लगाया। यह अपमानजनक अनुभव उनके लिए असहनीय हो गया।
“मेरी मेहनत का पैसा मेरे दुश्मनों को मजबूत कर रहा है”
नोट में उन्होंने लिखा कि उनकी पत्नी और उसके परिवार वाले उनसे लगातार पैसों की मांग करते थे। उन्होंने गुजारा भत्ता और अन्य खर्चों के रूप में लाखों रुपये दिए, लेकिन यह सब उनके दुश्मनों को और ताकतवर बनाता रहा।
आखिरी इच्छा: परिवार को न्याय, पत्नी को दंड
अतुल ने अपने माता-पिता और बेटे के भविष्य के लिए अपनी अंतिम इच्छाएं भी साझा कीं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनकी पत्नी और उसके परिवार को उनके शव के पास आने तक की अनुमति न दी जाए। बेटे की परवरिश उनके माता-पिता को सौंपी जाए, क्योंकि निकिता उसे सही संस्कार नहीं दे पाएगी।
उन्होंने लिखा कि उनकी अस्थियों का विसर्जन तब तक न किया जाए, जब तक उनकी पत्नी और उसके परिजनों को सजा न मिल जाए। यदि न्याय नहीं मिलता, तो उनकी अस्थियों को अदालत के बाहर गटर में बहा दिया जाए।
बंगलूरू पुलिस की कार्रवाई
मामले की जानकारी एनजीओ के माध्यम से मिलने पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पत्नी निकिता सिंघानिया, सास निशा सिंघानिया, साले अनुराग सिंघानिया, और चेचेरे ससुर सुशील सिंघानिया के खिलाफ केस दर्ज किया है।
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