बैंक ट्रांजेक्शन से होटल बिल तक राहत! अब हर जगह PAN दिखाना जरूरी नहीं, जानिए क्या होने जा रहा बदलाव

नई दिल्ली। केंद्र सरकार आयकर व्यवस्था को सरल और जनहितैषी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। वित्त मंत्रालय ने इनकम टैक्स ड्राफ्ट रूल 2026 का मसौदा जारी किया है, जिसमें पैन कार्ड से जुड़े कई नियमों में ढील देने का प्रस्ताव है। यदि ये नियम लागू होते हैं तो आम लोगों को बैंकिंग, खरीदारी और सेवाओं से जुड़े छोटे लेन-देन में बार-बार पैन कार्ड देने की अनिवार्यता से राहत मिल सकती है।
बैंक लेन-देन में राहत का प्रस्ताव
अब तक के नियमों के अनुसार एक ही दिन में 50 हजार रुपये से अधिक नकद जमा करने पर पैन कार्ड देना अनिवार्य होता है। हालांकि नए ड्राफ्ट नियमों में इसे बदलने का प्रस्ताव रखा गया है।
मसौदे के मुताबिक, अब पूरे वित्तीय वर्ष के दौरान एक या एक से अधिक बैंक खातों में कुल 10 लाख रुपये या उससे अधिक की नकद जमा या निकासी होने पर ही पैन कार्ड जरूरी होगा। यानी छोटे-छोटे कैश ट्रांजेक्शन करने वाले ग्राहकों को बड़ी राहत मिल सकती है।
वाहन खरीदने के नियम में भी बदलाव
वर्तमान में किसी भी कीमत की चारपहिया गाड़ी खरीदने पर पैन कार्ड देना अनिवार्य है, जबकि दोपहिया वाहन इस दायरे में नहीं आते।
प्रस्तावित नियमों के तहत दोपहिया और चारपहिया दोनों वाहनों के लिए 5 लाख रुपये की सीमा तय करने की बात कही गई है। यानी यदि वाहन की कीमत 5 लाख रुपये से अधिक है, तभी पैन कार्ड देना होगा। 5 लाख रुपये से कम कीमत की गाड़ी खरीदने पर पैन अनिवार्य नहीं रहेगा।
होटल, रेस्टोरेंट और इवेंट खर्च में राहत
हॉस्पिटैलिटी और इवेंट मैनेजमेंट सेक्टर से जुड़े खर्चों में भी बदलाव का प्रस्ताव है। फिलहाल 50 हजार रुपये से अधिक के होटल या रेस्टोरेंट बिल पर पैन कार्ड दिखाना जरूरी होता है।
नए ड्राफ्ट में इस सीमा को बढ़ाकर 1 लाख रुपये करने का सुझाव दिया गया है। यही नियम बैंक्विट हॉल, कन्वेंशन सेंटर और इवेंट मैनेजमेंट सेवाओं पर भी लागू होगा।
प्रॉपर्टी लेन-देन की सीमा बढ़ेगी
अचल संपत्ति के लेन-देन में भी राहत का प्रस्ताव है। वर्तमान में 10 लाख रुपये से अधिक की प्रॉपर्टी डील पर पैन कार्ड देना अनिवार्य है।
मसौदे के अनुसार इस सीमा को बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने की तैयारी है। यानी 20 लाख रुपये से कम की संपत्ति खरीद-बिक्री में पैन कार्ड देना जरूरी नहीं होगा।
कब से लागू हो सकते हैं नए नियम?
सूत्रों के मुताबिक, सरकार और केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) इन ड्राफ्ट नियमों पर विभिन्न हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां मांगेगा। प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन्हें मार्च 2026 के पहले सप्ताह तक अंतिम रूप देकर अधिसूचित किया जा सकता है।
संभावना है कि ये नए नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू हो जाएं और 1962 के पुराने आयकर नियमों की जगह लें।
अगर ये बदलाव लागू होते हैं तो आम करदाताओं को रोजमर्रा के लेन-देन में बड़ी सहूलियत मिल सकती है।
.webp)
