Fatehpur Triple Murder Case : 16 घंटे बाद भारी सुरक्षा में हुआ अंतिम संस्कार, परिजनों ने कहा- अब नहीं सह पाएंगे...

Fatehpur Triple Murder Case : फतेहपुर जिले के तिहरा गांव में हुए दिल दहला देने वाले तिहरे हत्याकांड के बाद बुधवार शाम को भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मृतकों का अंतिम संस्कार गंगा घाट पर किया गया। इससे पहले शवों का पोस्टमार्टम 16 घंटे तक इंतजार के बाद कराया गया था। प्रशासन की मौजूदगी में परिवार द्वारा रखी गई मांगों पर आश्वासन के बाद ही अंतिम संस्कार की अनुमति दी गई।
गांव में तनावपूर्ण माहौल
घटना में मारे गए विनोद उर्फ पप्पू सिंह, उनके भाई अनूप उर्फ पिंकू और उनके पुत्र अभय प्रताप की हत्या मंगलवार सुबह आपसी रंजिश में कर दी गई थी। आरोप है कि पूर्व प्रधान मुन्नू सिंह और उसके समर्थकों ने इन्हें गोलियों से भून डाला। रात 11 बजे के बाद डॉक्टर्स की एक टीम और वीडियोग्राफी की निगरानी में पोस्टमार्टम कराया गया। शव बुधवार सुबह चार बजे गांव लाए गए, जहां से माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया।
परिजनों ने किया अंतिम संस्कार से इनकार
जब पुलिस ने सुबह 10 बजे के आसपास अंतिम संस्कार करने की कोशिश की तो परिजनों ने साफ इनकार कर दिया। गांव में पहले से ही पुलिस और पीएसी की भारी तैनाती थी, बावजूद इसके किसान संगठनों और ग्रामीणों ने जोरदार विरोध दर्ज कराया। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष अनुज सिंह और उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह ने मौके पर पहुंचकर डीएम रविंद्र सिंह और एसपी धवल जायसवाल से वार्ता की। इसके बाद प्रशासन ने सभी मांगें पूरी करने का आश्वासन दिया।
गंगा किनारे अंतिम विदाई, 8 साल के बेटे ने दी मुखाग्नि
शवों को पहले घर के पीछे दाह संस्कार के लिए रखा जा रहा था, लेकिन अनूप की पत्नी मनीषा और उनकी बहनों नीलम व सोनी ने इसका विरोध किया। उनका कहना था कि रोज उसी जगह से गुजरते हुए वो दर्द सह नहीं पाएंगी, इसलिए गंगा किनारे ही अंतिम संस्कार हो। इस भावनात्मक अपील को मानते हुए शवों को गंगा घाट ले जाया गया, जहां शाम चार बजे अनूप के आठ वर्षीय बेटे शौर्य प्रताप सिंह ने अपने पिता, चाचा और भाई को मुखाग्नि दी।
अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब, लगे प्रशासन विरोधी नारे
अंतिम यात्रा में भाकियू कार्यकर्ता हरी टोपी में शामिल हुए और भारी भीड़ जुटी। शव यात्रा के दौरान महिलाओं की बड़ी भागीदारी भी देखने को मिली। लोगों ने "पप्पू सिंह अमर रहें" के नारे लगाए। पुलिस के खिलाफ आक्रोश भी देखा गया और "पुलिस प्रशासन मुर्दाबाद" के नारे गूंजे।
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