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फर्जी CBI ऑफिसर बनकर की 57 लाख की साइबर ठगी, 10 दिनों तक रखा डिजिटल अरेस्ट, फ्रॅाड का तरीका जान रह जांगे दंग

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मोतिहारी: बिहार के मोतिहारी में रिटायर्ड कृषि विभाग कर्मचारी दिलीप कुमार से 57 लाख रुपये की चौंकाने वाली साइबर ठगी का खुलासा हुआ है। यह ठगी खुद को फर्जी सीबीआई अधिकारी बताकर की गई, जिसमें उन्हें एक चर्चित मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी दी गई थी। ठग ने इतना डराया कि पीड़ित 10 दिनों तक घर में कैद रहकर मानसिक प्रताड़ना झेलते रहे और अंत में बड़ी रकम ठग के बताए खातों में ट्रांसफर कर दी।

कैसे रची गई जालसाजी की साजिश

दिलीप कुमार को एक दिन अचानक कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताया और कहा कि वह जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में संलिप्त पाए गए हैं, क्योंकि उनका पैन कार्ड इस मामले में प्रयोग हुआ है। साथ ही एक फर्जी वीडियो दिखाया गया जिसमें कथित रूप से सीबीआई कार्यालय नजर आ रहा था। ठग ने जान से मारने की धमकी तक दी, जिससे पीड़ित और उनकी पत्नी बुरी तरह डर गए।

डर के साये में, 2 फरवरी 2025 को दिलीप कुमार ने अपने और पत्नी के बैंक खातों से 57 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए। जब तक उन्हें समझ आता, बहुत देर हो चुकी थी। इसके बाद उन्होंने मोतिहारी साइबर थाना में पूरे मामले की शिकायत की।

ऐसे हुआ ठग का भंडाफोड़

मोतिहारी पुलिस की छानबीन में सबसे पहले ठगी की राशि कटिहार निवासी आकाश मुखर्जी के खाते में ट्रांसफर होने की बात सामने आई। इसके बाद एसपी स्वर्ण प्रभात के निर्देश पर साइबर सेल की एक विशेष टीम गठित की गई और कटिहार पुलिस की मदद से 12 जून 2025 को आकाश मुखर्जी को गिरफ्तार कर लिया गया।

पूछताछ में खुलासा हुआ कि 37 वर्षीय आकाश ने B.Tech तक पढ़ाई की है लेकिन नौकरी नहीं मिलने पर उसने पश्चिम बंगाल के एक युवक के साथ मिलकर साइबर ठगी का रास्ता अपनाया। इसी कमाई से उसने कटिहार में हार्डवेयर की दुकान खोल ली।

8 राज्यों में दर्ज हैं केस

आरोपी पर देश के 8 राज्यों में 21 से अधिक केस दर्ज हैं और उसने कई लोगों को इसी तरह से ठगी का शिकार बनाया है। 13 जून को आकाश मुखर्जी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।