Holi 2025: बसंत पंचमी से ब्रज में छाएगा होली का उल्लास, 40 दिन तक बिखरेंगे आस्था के अद्भुत रंग

Holi 2025 : ब्रज में होली का उल्लास इस बार पूरे 40 दिन तक मनाया जाएगा। जहां देश-विदेश में होली का पर्व दो दिन मनाया जाता है, वहीं ब्रज के मंदिरों में यह पर्व 3 फरवरी से बसंत पंचमी (Basant Panchami) के दिन शुरू होकर 14 मार्च तक पूर्णिमा तक चलेगा। ठाकुरजी के साथ होली का यह अनोखा उत्सव ब्रज में श्रद्धालुओं के बीच आस्था और रंगों के अद्भुत संगम का प्रतीक बनेगा।
बसंत पंचमी से शुरू होगी होली की धूम
बसंत पंचमी, जो 3 फरवरी को मनाई जाएगी, से ब्रज में होली का उत्सव आरंभ होगा। ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर सहित ब्रज के अन्य प्रमुख मंदिरों में 40 दिन तक होली की रंगीन धूम रहेगी। इस दौरान भक्तगण ठाकुरजी के साथ गुलाल और रंगों में डूबकर होली खेलेंगे। बांकेबिहारी मंदिर के सेवायत अशोक गोस्वामी के अनुसार, बसंत पंचमी के दिन ठाकुरजी के कपोलों और ठोड़ी पर गुलाल का शृंगार किया जाएगा। इसके बाद भक्तों पर गुलाल बरसाया जाएगा। यह परंपरा रंगभरनी एकादशी तक जारी रहेगी, जब ठाकुरजी खुद रंग, गुलाल, केसर और चोबा इत्र से होली खेलेंगे।
राधावल्लभ मंदिर में होली की विशेष परंपरा
ठाकुर राधावल्लभ मंदिर में भी बसंत पंचमी के अवसर पर विशेष आयोजन होंगे। मंदिर को बसंती रंग के पुष्पों और कपड़ों से सजाया जाएगा और ठाकुरजी को बसंती रंग की पोशाक पहनाई जाएगी। यहां भक्तगण सुबह और शाम होली के पदों का गायन करेंगे, जो पूरे 40 दिनों तक जारी रहेगा। इस परंपरा को गोस्वामी समाज द्वारा निभाया जाएगा, और हर दिन श्रद्धालुओं पर गुलाल की बौछार की जाएगी।
आस्था और रंगों का अद्भुत संगम
ब्रज में होली के इस विशेष रूप को देखकर यह साफ जाहिर होता है कि यह केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि आस्था, प्रेम और भक्तिरस का प्रतीक है। रंगों के इस उत्सव में श्रद्धालु न केवल ठाकुरजी के साथ होली खेलते हैं, बल्कि उनका आशीर्वाद भी प्राप्त करते हैं। इस 40 दिन की होली के दौरान भक्तों का उत्साह और श्रद्धा अपने चरम पर होगी, जो ब्रज की संस्कृति और परंपरा को जीवित रखेगा।
इस बार होली का यह विशेष उत्सव ब्रजवासियों और पर्यटकों के लिए एक अद्वितीय अनुभव साबित होगा, जहां रंगों के साथ-साथ आस्था के अद्भुत रंग भी बिखरेंगे।
.webp)
