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Kharmas 2024 : कल से शुरू हो रहा खरमास, जानें इसका गधों से क्या है खास कनेक्शन, पढ़कर रह जाएंगे दंग

Kharmas 2024 : कल से शुरू हो रहा खरमास, जानें इसका गधों से क्या है खास कनेक्शन, पढ़कर रह जाएंगे दंग

Kharmas 2024 : खरमास, जिसे मलमास भी कहा जाता है, हिंदू पंचांग में एक ऐसा समय होता है जब शुभ कार्यों पर रोक लगाई जाती है। कल यानि की रविवार 15 दिसंबर को खरमास लगेगा, जिसका समापन नए साल यानि कि साल 2025 में मकर संक्रांति पर होगा। क्या आप जानते है खरमास महीना गधों से जुड़ा हुआ है, इसके पीछे एक पौराणिक कथा है। आइए बताते है कि खरमास (Kharmas 2024) क्यों लगता है और इसका गधों से क्या कनेक्शन है।

मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, सूर्य देव अपने सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर निरंतर ब्रह्मांड की परिक्रमा करते हैं। उन्हें इस यात्रा के दौरान कहीं भी रुकने की अनुमति नहीं है। लेकिन यह निरंतरता घोड़ों के लिए कठिनाई बन गई। सालभर बिना रुके दौड़ते रहने के कारण घोड़े अत्यधिक प्यासे और थके हुए हो गए।

Kharmas 2024 : कल से शुरू हो रहा खरमास, जानें इसका गधों से क्या है खास कनेक्शन, पढ़कर रह जाएंगे दंग


घोड़ों की प्यास और सूर्य देव की दया

परिक्रमा के दौरान, सूर्य देव ने प्यास से तड़पते अपने घोड़ों की हालत देखी। उन्हें दया आ गई और उन्होंने घोड़ों को आराम देने और पानी पिलाने का निर्णय लिया। लेकिन समस्या यह थी कि सूर्य के रुकने से सौर मंडल का संतुलन बिगड़ सकता था, जिससे अनर्थ हो सकता था।

सूर्य देव असमंजस में पड़ गए। उनकी प्रतिज्ञा थी कि उनकी यात्रा में किसी भी प्रकार का विराम नहीं होना चाहिए। इस स्थिति में, उन्हें अपने घोड़ों को बचाने और यात्रा जारी रखने का कोई उपाय नहीं सूझ रहा था। इसी दौरान, सूर्य देव की नजर तालाब के पास खड़े दो गधों पर पड़ी। उन्होंने तुरंत घोड़ों को रथ से खोलकर आराम और पानी के लिए छोड़ दिया और उनकी जगह गधों को रथ में जोत लिया।

गधे, जिन्हें "खर" भी कहा जाता है, मंद गति से रथ खींचते रहे। इस धीमी गति के कारण पूरे पौष मास में सूर्य की ऊर्जा कमजोर होकर धरती तक पहुंची। यह काल ऊर्जा के कम प्रभाव का प्रतीक बन गया।

मकर संक्रांति और घोड़ों की वापसी

एक महीने के बाद, मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव पुनः उसी तालाब पर पहुंचे। उन्होंने गधों को रथ से हटाकर अपने घोड़ों को वापस जोता और आगे बढ़े। घोड़ों के रथ में लौटने के साथ ही सूर्य का तेज और ऊर्जा धरती पर फिर से बढ़ने लगी।

खरमास का महत्व

इस पौराणिक घटना के कारण, पौष मास को "खरमास" कहा जाने लगा। इस महीने में सूर्य की ऊर्जा और प्रकाश कमजोर माने जाते हैं। इसलिए इसे शुभ कार्यों के लिए अशुभ माना गया। खरमास के बाद मकर संक्रांति के साथ शुभता का आगमन होता है।

ज्योतिषीय महत्व

यह कथा प्रतीकात्मक रूप से सूर्य की ऊर्जा के कम प्रभाव को दर्शाती है। साथ ही, यह याद दिलाती है कि प्रकृति में हर ठहराव के बाद, नई शुरुआत और ऊर्जा का आगमन निश्चित है।