Mahakumbh 2025 : कोई 32 वर्षों से नहीं नहाया, तो किसी ने सिर पर उगाई फसलें, जानें लिलिपुट से लेकर रबड़ी बाबा तक के बारे में

Mahakumbh 2025 : प्रयागराज (Prayagraj) में आज से विश्व के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन महाकुंभ 2025 की शुरुआत हो गई है। इस महापर्व में साधु-संतों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। हर 12 साल में आयोजित होने वाले इस महाकुंभ में देशभर से कई अद्भुत और अनोखे साधु-संत पहुंचे हैं। इन साधु-संतों की तपस्या और जीवनशैली उन्हें खास बनाती है। महाकुंभ में हर कोने में दिलचस्प और अद्वितीय नज़ारे देखने को मिल रहे हैं। आइए, आज आपको महाकुंभ (Mahakumbh 2025) में आए कुछ ऐसे साधु-संतों के बारे में बताते है, जो लोगों को बीच र्चचा का क्रेंद्र बने है।
Mahakumbh 2025 : जानें महाकुंभ में आये अनोखे बाबा और साधु-सतों के बारे में
लिलिपुट बाबा: 32 वर्षों से नहीं किया स्नान
महाकुंभ (Mahakumbh 2025) में सबसे चर्चित नामों में से एक हैं लिलिपुट बाबा (Lilliput Baba), जो कद में छोटे है। इन बाबा की लंबाई 3 फीट 8 इंच है। खास बात यह है कि उन्होंने पिछले 32 वर्षों से स्नान नहीं किया है। यह तपस्या उन्हें विशेष बनाती है। लिलिपुट बाबा के पास आने वाले श्रद्धालु उनकी जीवनशैली और साधना के बारे में जानने के लिए उत्सुक रहते हैं।
टार्जन बाबा: 1972 मॉडल की एंबेसडर कार में सफर
मध्यप्रदेश से आए टार्जन बाबा (Tarzan Baba) अपनी 1972 मॉडल की एंबेसडर कार के साथ महाकुंभ (Mahakumbh 2025) में शामिल हुए हैं। पिछले 35 वर्षों से वे इस कार को अपने आवास और यात्रा का साधन बनाए हुए हैं। इस अनोखी साधना और उनकी जीवनशैली ने उन्हें "टार्जन कार वाले बाबा" का नाम दिया है। श्रद्धालु उनकी पुरानी कार और उनके अनुभवों को सुनने के लिए उमड़ रहे हैं।
अनाज वाले बाबा: सिर पर उगाई फसलें
उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के अमरजीत, जिन्हें अनाज वाले बाबा (Anaj Wale Baba) के नाम से जाना जाता है, इस बार महाकुंभ के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। बाबा ने अपने सिर पर गेहूं, बाजरा और चना जैसी फसलें उगा रखी हैं। यह अद्भुत दृश्य लोगों को चकित कर रहा है। उनकी इस तपस्या के पीछे प्रकृति और आध्यात्मिकता का संदेश छिपा है, जिसे जानने के लिए लोग उनके पास जा रहे हैं।
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चाबी वाले बाबा: 20 किलो की चाबी के साथ यात्रा
महाकुंभ (Mahakumbh 2025) में चाबी वाले बाबा (Chabhi Wale Baba) की उपस्थिति भी लोगों को हैरान कर रही है। वे अपने साथ 20 किलो की चाबी लेकर चलते हैं। उनका मानना है कि यह चाबी "राम नाम की चाबी" है, जो जीवन के सभी द्वार खोल सकती है। उनकी साधना और इस प्रतीकात्मक चाबी का संदेश श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है।
गोल्डन बाबा और टंकी बाबा
महाकुंभ में गोल्डन बाबा (Golden Baba) और टंकी बाबा (Tanki Baba) भी पहुंचे हैं। गोल्डन बाबा सोने के आभूषणों से लदे रहते हैं, जबकि टंकी बाबा अपनी विशेष साधना के लिए प्रसिद्ध हैं। वहीं, एक अन्य बाबा, जिन्होंने पिछले 50 वर्षों से अपना हाथ नीचे नहीं रखा है, भी महाकुंभ में श्रद्धालुओं का ध्यान खींच रहे हैं।
रबड़ी बाबा: निस्वार्थ सेवा का प्रतीक
श्री महंत देवगिरि, जिन्हें रबड़ी बाबा (Rabadi Baba) के नाम से जाना जाता है, महाकुंभ में अपनी निस्वार्थ सेवा के लिए मशहूर हो गए हैं। श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी से जुड़े रबड़ी बाबा हर दिन सुबह 8 बजे से देर रात तक एक बड़ी कढ़ाई में दूध उबालकर मलाईदार रबड़ी तैयार करते हैं। यह रबड़ी वे श्रद्धालुओं को मुफ्त में परोसते हैं। उनकी सेवा भावना और समर्पण की हर कोई प्रशंसा कर रहा है।
महाकुंभ 2025: अध्यात्म और विविधता का संगम
महाकुंभ (Mahakumbh 2025) केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और विविधता का प्रतीक है। इस बार का महाकुंभ अद्वितीय है क्योंकि यहां पहुंचे साधु-संतों की तपस्या और जीवनशैली ने इसे और भी खास बना दिया है।
इन अनोखे साधु-संतों की उपस्थिति और उनकी कहानियां महाकुंभ को न केवल धार्मिक, बल्कि एक अद्वितीय सांस्कृतिक अनुभव भी बनाती हैं। प्रयागराज का यह महापर्व सभी श्रद्धालुओं के लिए यादगार साबित हो रहा है।
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