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Jaunpur : 50 से कम छात्र संख्या वाले 500 से अधिक स्कूलों का होगा विलय, आंगनबाड़ी केंद्र बनाए जाने की तैयारी

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21 ब्लॉकों में 2807 परिषदीय विद्यालय, 536 में 50 से कम छात्र


जौनपुर। जौनपुर जिले में 50 से कम छात्र संख्या वाले परिषदीय विद्यालयों का चरणबद्ध तरीके से विलय किया जाएगा। कुल 21 विकास खंडों में संचालित 2807 परिषदीय विद्यालयों में से लगभग 536 विद्यालय ऐसे हैं, जहां छात्रों की संख्या 50 से भी कम है। पिछले सत्र के प्रेरणा पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार इन स्कूलों को बंद कर, वहां पढ़ रहे छात्रों को नजदीकी स्कूलों में स्थानांतरित किया जाएगा।

 

इस संबंध में हाल ही में मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को पत्र जारी कर दिशा-निर्देश दिए हैं। निर्देश में कहा गया है कि जिन विद्यालयों का विलय किया जाना है, उनका सर्वे कर मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार की जाए। बंद होने वाले विद्यालय भवनों में आंगनबाड़ी केंद्र या अन्य शैक्षिक गतिविधियों के संचालन की योजना बनाई जा रही है।

 

बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. गोरखनाथ पटेल ने बताया कि सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर पांच कार्य दिवस के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। शासन की मंशा के अनुसार जुलाई से पहले चरण में कुछ विद्यालयों को पेयर कर संचालित करने की तैयारी है। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में छात्रों की संख्या, उनके लिए उपलब्ध सुविधाएं, भवन की स्थिति, सड़क संपर्क और सुरक्षा को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। सभी बीईओ को कहा गया है कि विलय से पहले स्थानीय अभिभावकों और शिक्षकों से संवाद जरूर किया जाए।

 

30 छात्रों पर एक शिक्षक का नियम

 

शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत प्राथमिक विद्यालयों में 30 छात्रों पर एक शिक्षक और उच्च प्राथमिक में 35 छात्रों पर एक शिक्षक होना जरूरी है। जिले के कई स्कूलों में छात्र संख्या 10 से 20 के बीच है, जबकि वहां अपेक्षाकृत अधिक शिक्षक नियुक्त हैं। इससे शैक्षणिक संसाधनों का समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा है।

 

नवाचार और गुणवत्ता सुधार की दिशा में कदम

 

शिक्षा विभाग का मानना है कि कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार की गुंजाइश कम होती है। ऐसे में छात्रों को बेहतर शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराने और संसाधनों के प्रभावी इस्तेमाल के लिए ये कदम उठाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि बेहतर स्कूलों में दाखिले से छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और शिक्षकों की विशेषज्ञता का लाभ मिलेगा।


बेसिक शिक्षा अधिकारी, डॉ. गोरखनाथ पटेल ने बताया कि सभी बीईओ को निर्देशित किया गया है कि वे छात्रों की संख्या व नामांकन के अनुसार रिपोर्ट तैयार कर कार्यालय को पांच दिन के भीतर सौंपें। शासन की मंशा के अनुरूप जुलाई में कुछ स्कूलों को जोड़कर संचालन शुरू कराने की योजना है।


विलय पर उठ रहे सवाल, शिक्षकों में नाराजगी

प्रदेश अध्यक्ष, शिक्षक संघ, अमित सिंह ने बताया कि विद्यालयों का विलय कहीं सिर्फ सरकारी कागजों तक ही सीमित न रह जाए, यह जरूरी है। गरीब बच्चों की शिक्षा के साथ यह सीधा समझौता है। उन्हें नजदीकी स्कूलों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी सुनिश्चित होनी चाहिए।

अमित सिंह
प्रदेश अध्यक्ष, शिक्षक संघ- अमित सिंह


बेसिक शिक्षक संघ उत्तर प्रदेश, प्रदेश मंत्री, वीरेंद्र यादव ने बताया कि कम छात्रों वाले स्कूलों में सुधार की आवश्यकता है, न कि उन्हें बंद करने की। विलय की यह व्यवस्था शिक्षा को समाप्त करने का संकेत है। इसका असर न केवल बच्चों पर, बल्कि बीएड व बीटीसी कर रहे युवाओं के भविष्य पर भी पड़ेगा।”

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बेसिक शिक्षक संघ उत्तर प्रदेश, प्रदेश मंत्री- वीरेंद्र यादव