90 के दशक की चर्चित अभिनेत्री Mamata Kulkarni ने लिया सन्यास, महाकुंभ जाकर किन्नर अखाड़े की बनीं महामंडलेश्वर

Mamta Kulkarni : 90 के दशक में बॉलीवुड का एक मशहूर चेहरा रहीं ममता कुलकर्णी (Mamta Kulkarni) ने आधिकारिक रूप से सन्यास लेने के बाद अब साध्वी बनने का रास्ता चुना है। शुक्रवार को ममता महाकुंभ (Mahakumbh 2025) में किन्नर अखाड़े पहुंचीं, जहां उन्होंने आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी से मुलाकात की और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
ममता भगवा रंग के कपड़े, गले में रुद्राक्ष की माला, और कंधे पर भगवा थैला लिए साध्वी के वेश में नजर आईं। उनका नया नाम माई ममतानंद गिरि रखा गया है। सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें ममता साधुओं की तरह भगवा परिधान में दिख रही हैं।
महामंडलेश्वर बनने पर हुई चर्चा
डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के साथ मुलाकात के दौरान, ममता ने महामंडलेश्वर बनने को लेकर लगभग एक घंटे तक चर्चा की। इसके बाद वे अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी से भी मिलने गईं। इस बातचीत में ममता ने धर्म और आध्यात्म पर अपने विचार रखे। उन्होंने भगवान राम और माता सीता की खोज से जुड़ी पौराणिक कथा का भी उल्लेख किया।
महाकुंभ को बताया यादगार अनुभव
ममता कुलकर्णी (Mamta Kulkarni) ने महाकुंभ की भव्यता को देखते हुए इसे अपने जीवन का एक यादगार पल बताया। उन्होंने कहा, "यह मेरा सौभाग्य है कि मैं महाकुंभ के इस पावन अवसर की साक्षी बन रही हूं।"
किन्नर अखाड़े की स्थापना और उद्देश्य
किन्नर अखाड़ा, जिसकी स्थापना 2015 में सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने की थी, ट्रांसजेंडर समुदाय को समाज की मुख्यधारा में जोड़ने के उद्देश्य से बनाया गया था। यह अखाड़ा किन्नरों को सम्मान और समानता दिलाने के लिए काम कर रहा है।
ममता कुलकर्णी का बॉलीवुड सफर
52 वर्षीय ममता कुलकर्णी ने 90 के दशक में बॉलीवुड में अपनी एक अलग पहचान बनाई थी। उन्होंने 'करण अर्जुन', 'क्रांतिवीर', 'सबसे बड़ा खिलाड़ी', 'चाइना गेट' और 'आंदोलन' जैसी कई हिट फिल्मों में अभिनय किया। उनकी आखिरी हिंदी फिल्म 2002 में रिलीज हुई 'कभी तुम कभी हम' थी।
अब ममता कुलकर्णी का ध्यान आध्यात्मिक जीवन और समाज सेवा की ओर है। उनका साध्वी बनना उनके जीवन का एक नया अध्याय है।
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