Budget 2025: हलवा सेरेमनी से लेकर अधिकारियों को बेसमेंट में बंद करने तक, जानें बजट से जुड़े कुछ दिलचस्प फैक्ट्स

Budget 2025 : केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance minister Nirmala Sitharaman)1 फरवरी को लोकसभा में आम बजट (Aam Budget) पेश करेंगी। यह बजट वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए होगा। हालांकि बजट 1 फरवरी को ही प्रस्तुत किया जाएगा, इसके लिए तैयारियां काफी पहले से शुरू हो जाती हैं। बजट से पहले इसे तैयार करने वाले विशेष अधिकारियों को बाहरी दुनिया से अलग रखा जाता है, और इस दौरान हलवा सेरेमनी (Halwa Ceremony) जैसी परंपराएँ निभाई जाती हैं। वहीं, कुछ परंपराओं में बदलाव भी हुए हैं। इस लेख में हम बजट (Budget 2025) से जुड़ी सभी परंपराओं और बदलावों पर चर्चा करेंगे।
हलवा सेरेमनी: बजट तैयार करने की परंपरा
बजट (Budget 2025) की तैयारियों के बीच एक विशेष परंपरा होती है, जिसे "हलवा सेरेमनी" कहा जाता है। इस बार यह रस्म 24 जनवरी को हुई। हर साल बजट से पहले यह रस्म अदा की जाती है, जिसमें बजट तैयार करने वाले अधिकारियों को हलवा परोसा जाता है। इस दौरान 'लॉक-इन पीरियड' की शुरुआत होती है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि बजट से संबंधित कोई भी दस्तावेज लीक न हो जाए।
बजट तैयार करने वाले अधिकारियों को क्यों रखा जाता है बंद?
बजट बनाने वाली टीम के अधिकारियों को लोकसभा में बजट पेश होने से पहले वित्त मंत्रालय के बेसमेंट में एक सप्ताह के लिए बंद कर दिया जाता है। इसका मुख्य कारण यह है कि बजट से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी लीक न हो जाए। पहले यह अवधि दो सप्ताह की थी, लेकिन अब इसे एक सप्ताह तक सीमित कर दिया गया है। इस दौरान अधिकारियों से मोबाइल फोन ले लिए जाते हैं और उन्हें किसी से मिलने की अनुमति नहीं होती।
1 फरवरी को बजट पेश करने की परंपरा
भारत सरकार का केंद्रीय बजट पहले फरवरी के अंत यानी 28 फरवरी को पेश किया जाता था, लेकिन 2017 में मोदी सरकार ने इसे बदलकर 1 फरवरी करने की परंपरा शुरू की। इसके पीछे दो मुख्य कारण थे: पहला, बजट पेश करने और लागू होने के बीच समय अंतराल को कम करना, और दूसरा, रेल बजट का आम बजट में विलय करना, ताकि नए नियमों और बदलावों के लिए पर्याप्त समय मिल सके।
बजट पेश करने का समय क्यों बदला?
ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में आम बजट शाम 5 बजे पेश किया जाता था, ताकि ब्रिटेन में समय के हिसाब से यह सही हो। 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में इस परंपरा को बदल दिया गया। तब से बजट सुबह 11 बजे पेश किया जाने लगा। इस बदलाव का उद्देश्य भारत की स्वायत्तता और अपनी पहचान को व्यक्त करना था।
चमड़े के ब्रीफकेस से लाल कवर तक: बजट दस्तावेज का बदलाव
पहले बजट दस्तावेज चमड़े के ब्रीफकेस में रखे जाते थे। लेकिन 2019 में निर्मला सीतारमण ने इस परंपरा को बदलते हुए बजट के दस्तावेज को लाल रंग के कपड़े में रखा। यह बदलाव पश्चिमी परंपराओं से मुक्त होकर भारतीय परंपरा की ओर संकेत करता है। 2021 में, सीतारमण ने पेपरलेस बजट पेश किया, जिसमें टैबलेट का इस्तेमाल हुआ था।
वित्तीय वर्ष की शुरुआत 1 अप्रैल से क्यों होती है?
भारत में वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से शुरू होकर 31 मार्च तक चलता है, जबकि नए साल की शुरुआत 1 जनवरी से होती है। इसके पीछे भारतीय कृषि चक्र और ब्रिटेन की वित्तीय परंपरा का प्रभाव है। भारत में कृषि का बहुत बड़ा हिस्सा है, और अप्रैल में रबी फसलों की कटाई होती है, जिससे यह समय वित्तीय वर्ष की शुरुआत के लिए उपयुक्त होता है।
बजट लोकसभा में क्यों पेश किया जाता है?
भारत में बजट को लोकसभा में पेश किया जाता है, क्योंकि यह सरकार के खजाने में जमा किए गए टैक्स से संबंधित होता है। लोकसभा में पारित होने के बाद इसे राज्यसभा में भेजा जाता है। राज्यसभा इसमें कुछ सुझाव दे सकती है, लेकिन यह सुझाव लोकसभा के लिए अनिवार्य नहीं होते।
रेल बजट का विलय और 10,000 करोड़ की बचत
2017 में आम बजट और रेल बजट को मिला दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 10,000 करोड़ रुपये की बचत हुई। पहले दोनों बजट अलग-अलग पेश होते थे, लेकिन 2016 में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इसे मिलाने का निर्णय लिया, जिससे सरकारी खर्चों में कमी आई और रेलवे विकास की दिशा में तेजी से बढ़ी।
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