Holi 2025 : कहीं जलते अंगारों से, तो कहीं एक-दूसरे पर पत्थर बरसाकर, भारत के इन जगहों पर अनोखे तरीकों से मनाई जाती है होली

Holi 2025 : भारत में होली सिर्फ रंगों का त्योहार ही नहीं, बल्कि विविध परंपराओं और मान्यताओं से भरा उत्सव है। अलग-अलग क्षेत्रों में इसे अलग-अलग तरीकों से मनाने की परंपरा इसे और भी खास बना देती है। कहीं फूलों की होली (Holi 2025) खेली जाती है, तो कहीं लट्ठमार होली होती है। लेकिन कुछ स्थान ऐसे भी हैं जहां होली बेहद अनोखे और चौंकाने वाले तरीकों से मनाई जाती है। आइए जानते हैं उन खास जगहों के बारे में।
Holi 2025 : जानें कहां अनोखे अंदाज में मनाई जाती है होली
🔥 आग के अंगारों से खेली जाती है होली
कर्नाटक के कुछ हिस्सों और मध्यप्रदेश के मालवा क्षेत्र में होली (Holi 2025) के दिन जलते हुए अंगारे एक-दूसरे पर फेंकने की परंपरा है। ऐसा माना जाता है कि इससे बुरी शक्तियां नष्ट हो जाती हैं और होलिका राक्षसी का अंत होता है।
🏹 राख पर चलने और पत्थर बरसाने की अनोखी परंपरा
राजस्थान के बांसवाड़ा में होली (Holi 2025) का जश्न बेहद अलग अंदाज में मनाया जाता है। यहां आदिवासी समुदाय गुलाल के साथ-साथ होलिका दहन की राख पर नंगे पैर चलते हैं। इसके अलावा, यहां एक अनोखी परंपरा भी है जिसमें लोग एक-दूसरे पर पत्थर फेंकते हैं। मान्यता है कि पत्थरों से चोट लगना और खून निकलना आने वाले साल के लिए शुभ संकेत होता है।
💑 होली पर जीवनसाथी चुनने की अनोखी परंपरा
मध्यप्रदेश के भील आदिवासी समुदाय में होली (Holi 2025 ) का त्योहार जीवनसाथी चुनने का अवसर भी होता है। होली के दिन विशेष बाजार लगता है, जहां युवा लड़के और लड़कियां अपने लिए साथी ढूंढने आते हैं। आदिवासी लड़के पारंपरिक वाद्ययंत्र बजाकर डांस करते हैं और अपनी पसंदीदा लड़की को गुलाल लगाते हैं। अगर लड़की को भी लड़का पसंद आ जाता है, तो वह भी उसे गुलाल लगाती है और फिर दोनों विवाह के बंधन में बंध जाते हैं।
🚫 एक गांव जहां नहीं मनाई जाती होली
हरियाणा के कैथल जिले के दूसरपुर गांव में होली (Holi 2025) नहीं मनाई जाती। इसके पीछे एक पुरानी मान्यता है कि एक संत, बाबा श्रीराम स्नेही दास, गांववालों की किसी बात से नाराज होकर होलिका दहन में कूद गए थे। उन्होंने मरते समय गांव को श्राप दिया कि यहां होली मनाने से अपशगुन होगा। तब से लेकर आज तक इस गांव में होली नहीं मनाई जाती।
🦂 बिच्छुओं की होली—इटावा का चौंकाने वाला त्योहार
उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के ताखा क्षेत्र के सौंथना गांव में होली (Holi 2025) कुछ अलग ही अंदाज में मनाई जाती है। होली के दिन जब ढोल और फाग के गीत गूंजते हैं, तो जमीन के अंदर से सैकड़ों जहरीले बिच्छू बाहर आ जाते हैं। स्थानीय लोग इन बिच्छुओं को अपने हाथों में लेकर एक-दूसरे पर फेंकते हैं। आश्चर्य की बात यह है कि ये बिच्छू किसी को काटते नहीं। स्थानीय मान्यता के अनुसार, ये बिच्छू होली की शुभकामनाएं देने आते हैं। यह परंपरा सैकड़ों वर्षों से चली आ रही है।
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