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Makar Sankranti 2026: क्यों उड़ाई जाती है इस दिन पतंग? जानें प्रभु श्रीराम से क्या हैं इसका कनेक्शन

Makar Sankranti

मकर संक्रांति हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में से एक है। हिंदू पंचांग के अनुसार पौष मास में जब सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तब इस पर्व को मनाया जाता है। इस वर्ष सूर्य का मकर राशि में गोचर 14 जनवरी को दोपहर करीब 3:13 बजे होगा, इसी कारण मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जाएगी। यह पर्व फसल कटाई, नए आरंभ और सूर्य की ऊर्जा के स्वागत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन तिल-गुड़ का सेवन, गंगा स्नान, दान-पुण्य और शुभ कार्यों की शुरुआत की परंपरा है। इसके साथ ही मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाना भी खास महत्व रखता है।

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मकर संक्रांति पर पतंग क्यों उड़ाई जाती है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन सबसे पहले भगवान श्रीराम ने पतंग उड़ाई थी। कथा है कि एक बार प्रभु श्रीराम की पतंग इतनी ऊंचाई तक गई कि वह इंद्रलोक तक पहुंच गई। इसी प्रसंग से मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की परंपरा जुड़ गई। रामचरितमानस के बालकांड में भी भगवान राम द्वारा पतंग उड़ाने का उल्लेख मिलता है। तुलसीदास ने लिखा है—
 

“राम इक दिन चंग उड़ाई।
इंद्रलोक में पहुँची जाई॥”

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पतंगबाजी का वैज्ञानिक महत्व

वैज्ञानिक दृष्टि से भी पतंग उड़ाने की परंपरा काफी लाभकारी मानी जाती है। मकर संक्रांति के समय ठंड धीरे-धीरे कम होने लगती है और मौसम में बदलाव शुरू होता है। इस दौरान धूप में रहना शरीर के लिए फायदेमंद होता है। पतंग उड़ाते समय व्यक्ति खुले आसमान में धूप का आनंद लेता है, जिससे शरीर को प्राकृतिक विटामिन-डी मिलता है। इससे हड्डियां मजबूत होती हैं, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और सर्दियों से जुड़ी कई परेशानियों से राहत मिलती है। इसके अलावा पतंग उड़ाने में शरीर की अच्छी-खासी शारीरिक गतिविधि होती है, जिससे शरीर सक्रिय और ऊर्जावान बना रहता है।

पतंगबाजी का इतिहास

पतंगबाजी की परंपरा करीब दो हजार साल पुरानी मानी जाती है। इसकी शुरुआत चीन से हुई थी, जहां पतंगों का उपयोग संदेश भेजने और सैन्य संकेत देने के लिए किया जाता था। बाद में चीनी यात्रियों फाह्यान और ह्वेन त्सांग के माध्यम से पतंग भारत पहुंची। मुगल काल में पतंगबाजी एक लोकप्रिय शौक और मनोरंजन बन गई, यहां तक कि पतंगबाजी की प्रतियोगिताएं भी होने लगीं। समय के साथ यह परंपरा भारतीय समाज और त्योहारों का अभिन्न हिस्सा बन गई।