Republic Day 2025 : 75 सालों में कितना बदला देश का संविधान, हुए 106 संशोधन, पढ़ें 25 सबसे अहम बदलाव के बारे में

Republic Day 2025 : भारत आज 26 जनवरी को अपना 76वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। इस खास मौके पर हम आपको भारत के संविधान के 75 साल के सफर की एक दिलचस्प कहानी बताएंगे। भारत का संविधान, जिसे 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया था, अब तक 106 बार संशोधित किया जा चुका है। यह दुनिया का दूसरा सबसे पुराना संविधान है, जो अब भी मजबूती से भारत के लोकतंत्र का आधार बना हुआ है।
भारत के संविधान में किए गए इन संशोधनों ने देश की राजनीति, समाज और कानून पर गहरा प्रभाव डाला है। यहां हम आपको 25 सबसे अहम संशोधनों की जानकारी देंगे, जिन्होंने भारत के संविधान और उसके सिद्धांतों को नया रूप दिया।
संविधान में 25 सबसे चर्चित संशोधन और उनके प्रभाव
- पहला संविधान संशोधन (1951)
मौलिक अधिकारों की सीमा तय की गई और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कुछ पाबंदियां लगाई गईं।
- चौथा संविधान संशोधन (1955)
राष्ट्रीय खनिज और तेल संसाधनों पर नियंत्रण के साथ निजी संपत्ति की तलाशी और जब्ती के लिए वारंट अनिवार्य किया गया।
- नौवां संविधान संशोधन (1960)
भारत-पाकिस्तान के बीच हुए समझौते के तहत सीमाओं का पुनर्निर्धारण।
- 17वां संविधान संशोधन (1964)
भूमि अधिग्रहण कानून लागू कर संपत्ति अधिग्रहण को वैध किया गया।
- 25वां संविधान संशोधन (1971)
संपत्ति के अधिकार पर पाबंदियां लगाकर निजी संपत्ति के अधिग्रहण पर मुआवजे की शर्तें तय की गईं।
- 31वां संविधान संशोधन (1973)
संसद में सीटों की संख्या 525 से बढ़ाकर 545 की गई।
- 39वां संविधान संशोधन (1975)
प्रधानमंत्री और अन्य उच्च पदों को न्यायिक समीक्षा से बाहर रखा गया।
- 41वां संविधान संशोधन (1976)
सरकारी कर्मियों की सेवानिवृत्ति की आयु 60 से बढ़ाकर 62 साल की गई।
- 44वां संविधान संशोधन (1979)
आपातकाल के बाद मानवाधिकारों की सुरक्षा और कार्यपालिका के दुरुपयोग को रोकने के लिए कई प्रावधान जोड़े गए।
- 52वां संविधान संशोधन (1985)
दल-बदल विरोधी कानून लागू किया गया।
- 61वां संविधान संशोधन (1989)
मतदान की न्यूनतम आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष की गई।
- 73वां संविधान संशोधन (1992)
ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत किया गया।
- 74वां संविधान संशोधन (1992)
शहरी क्षेत्रों में नगरपालिकाओं को प्रशासनिक दर्जा दिया गया।
- 77वां संविधान संशोधन (1995)
अनुसूचित जाति और जनजाति के कर्मियों को प्रोन्नति में आरक्षण का प्रावधान।
- 86वां संविधान संशोधन (2002)
6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाया गया।
- 91वां संविधान संशोधन (2004)
कैबिनेट मंत्रियों की संख्या विधायकों के 15% तक सीमित की गई और दल-बदल कानून को मजबूत किया गया।
- 93वां संविधान संशोधन (2006)
ओबीसी आरक्षण को निजी शिक्षा संस्थानों में लागू किया गया।
- 97वां संविधान संशोधन (2011)
सहकारी समितियों को संवैधानिक दर्जा दिया गया।
- 99वां संविधान संशोधन (2014)
राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) की स्थापना, जिसे बाद में असंवैधानिक घोषित किया गया।
- 101वां संविधान संशोधन (2016)
संपूर्ण देश में वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू किया गया।
- 103वां संविधान संशोधन (2019)
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को 10% आरक्षण का प्रावधान।
- 104वां संविधान संशोधन (2020)
लोकसभा और विधानसभाओं में एंग्लो-इंडियन समुदाय के लिए आरक्षित सीटें समाप्त की गईं।
- 105वां संविधान संशोधन (2021)
राज्यों को ओबीसी की सूची तय करने का अधिकार दिया गया।
- 106वां संविधान संशोधन (2023)
लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान।
भारत का संविधान: दुनिया के लिए मिसाल
भारत का संविधान न केवल दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान है, बल्कि इसकी स्थिरता और लचीलापन इसे अन्य देशों के लिए एक मिसाल बनाता है। पिछले 75 वर्षों में यह देश की विविधता, लोकतंत्र और एकता को बनाए रखने का सबसे सशक्त माध्यम बना रहा है।
इस गणतंत्र दिवस पर संविधान के इन बदलावों को समझना, भारत के लोकतंत्र की ताकत और उसकी यात्रा को सलाम करने जैसा है।
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