Balochistan : पुलिस कार्रवाई के खिलाफ प्रदर्शन, बलूच समुदाय ने निकाली विरोध रैली

Balochistan : बलूचिस्तान के लासबेला में पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों पर की गई कार्रवाई के विरोध में बलूच मानवाधिकार संगठन बलूच यकजेहती समिति (BYC) ने बड़ी रैली निकाली। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने अपने समुदाय पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ आवाज बुलंद की और लापता कार्यकर्ताओं की सुरक्षित वापसी की मांग की।
पुलिस की बर्बरता के खिलाफ सड़कों पर उतरे बलूच लोग
रिपोर्ट्स के अनुसार, लासबेला में हाल ही में हुए शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की और आंसू गैस के गोले दागे। इस कार्रवाई से नाराज बलूच यकजेहती समिति ने विरोध में एक रैली का आयोजन किया, जिसमें बड़ी संख्या में बलूच नागरिक शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने बलूच लोगों पर हो रहे दमन और जबरन गायब किए जा रहे लोगों के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया।
गिरफ्तारी और गुमशुदगी के खिलाफ प्रदर्शन
बलूच यकजेहती समिति ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी दी कि महरंग बलूच, बेबिगर बलूच और बेबो बलूच की गिरफ्तारी और लापता होने के विरोध में 24 मार्च को धरना दिया जाएगा। समिति ने स्पष्ट किया कि जब तक सभी कार्यकर्ताओं को सुरक्षित वापस नहीं लाया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। समिति ने कहा, "हम चुप नहीं बैठेंगे, क्योंकि चुप रहना उत्पीड़न को सहना होता है।"
संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत की प्रतिक्रिया
बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता महरंग बलूच की गिरफ्तारी पर संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत मैरी लॉलर ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "बलूच यकजेहती समिति के प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी चिंताजनक है। बलूच लोगों की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है।"
बलूच समुदाय में बढ़ता आक्रोश
महरंग बलूच को क्वेटा पुलिस ने शनिवार को उस समय गिरफ्तार किया जब वह अपने समुदाय के अधिकारों के लिए धरना प्रदर्शन कर रही थीं। बलूच यकजेहती समिति द्वारा बुलाए गए इन प्रदर्शनों के चलते बलूचिस्तान में तनाव की स्थिति बनी हुई है। बलूच कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार और सुरक्षा एजेंसियां उनके समुदाय की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।
बलूचिस्तान में लगातार बढ़ रहे विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए प्रशासन की चिंता भी बढ़ गई है। पुलिस और सरकार की ओर से इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन बलूच समुदाय की नाराजगी को नजरअंदाज करना अब मुश्किल होता जा रहा है।
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