स्विट्जरलैंड में बुर्का हुआ बैन, जानें क्यों लगाया गया प्रतिबंध

नई दिल्ली: स्विट्जरलैंड में 1 जनवरी 2025 से चेहरा ढकने पर प्रतिबंध लागू हो गया है। इस कानून के तहत सार्वजनिक स्थानों पर बुर्का, नकाब या किसी भी तरह से चेहरा ढकने की अनुमति नहीं होगी। यह कानून 2021 में हुए एक जनमत संग्रह के बाद पारित हुआ था, जिसमें बहुमत ने चेहरा ढकने पर प्रतिबंध का समर्थन किया था।
क्यों लगाया गया प्रतिबंध?
सरकार ने इस कानून को "सार्वजनिक सुरक्षा और लैंगिक समानता" के नाम पर लागू किया है। अधिकारियों का कहना है कि यह कानून महिलाओं को दबावमुक्त करने और सांस्कृतिक एकरूपता को बढ़ावा देने के लिए है। हालांकि, इसे कई मानवाधिकार संगठनों और मुस्लिम समुदायों द्वारा धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया जा रहा है।
क्या-क्या प्रतिबंधित है?
सार्वजनिक स्थानों पर बुर्का और नकाब पहनना।
मास्क या अन्य कोई ऐसा कपड़ा जिससे चेहरा पूरी तरह ढक जाए (स्वास्थ्य और मौसम से जुड़े अपवादों को छोड़कर)।
प्रदर्शनों और हिंसक गतिविधियों में चेहरा ढकना।
मुस्लिम समुदाय पर प्रभाव
स्विट्जरलैंड में मुस्लिम समुदाय कुल जनसंख्या का लगभग 5% है। इनमें से अधिकांश महिलाएं बुर्का या नकाब नहीं पहनतीं। हालांकि, यह कानून मुख्य रूप से उन्हीं पर प्रभाव डालेगा जो पारंपरिक धार्मिक पोशाक पहनती हैं। आलोचकों का मानना है कि यह कानून अल्पसंख्यकों के प्रति भेदभावपूर्ण है।
कौन-कौन से देशों में है ऐसा प्रतिबंध?
स्विट्जरलैंड से पहले फ्रांस, बेल्जियम, नीदरलैंड, डेनमार्क और ऑस्ट्रिया जैसे देशों में भी बुर्का और नकाब पर प्रतिबंध लागू किया जा चुका है। इन देशों ने भी इसे सार्वजनिक सुरक्षा और समानता का मुद्दा बताया है।
विवाद और आलोचना
इस कानून को लेकर विवाद बना हुआ है। मानवाधिकार संगठन इसे व्यक्तिगत आजादी और धार्मिक स्वतंत्रता का हनन बता रहे हैं। वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि यह कानून सांस्कृतिक समावेश को बढ़ावा देगा।
स्विट्जरलैंड में इस नए कानून के लागू होने के बाद इसे लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई है। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में इसका समाज और राजनीति पर क्या असर पड़ता है।
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