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जूते से मारूंगा, जेल भेज दूंगा...पूर्व सैनिक का पुलिस ने किया अपमान, घर में घुसकर दी गालियां और धमकी

जूते से मारूंगा, जेल भेज दूंगा...पूर्व सैनिक का पुलिस ने किया अपमान, घर में घुसकर दी गालियां और धमकी

जौनपुर। देश की रक्षा करने वाले वीर सैनिकों का सम्मान करना हमारा कर्तव्य है, लेकिन जौनपुर जिले में एक पूर्व सैनिक को पुलिस की बदसलूकी और धमकियों का शिकार होना पड़ा। जफराबाद थाना क्षेत्र के पौना गांव में हुई इस शर्मनाक घटना ने कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बूढ़ी माँ और बच्चों के सामने पुलिस की गुंडागर्दी

पूर्व सैनिक दिनेश यादव, जो भारतीय सेना में अपनी सेवा दे चुके हैं, वर्तमान में अपने गांव में रहते हैं। 18 मार्च की शाम करीब 5:45 बजे, जब वह किसी कार्य से जिला मुख्यालय गए हुए थे, तभी थाना प्रभारी जय प्रकाश यादव और उपनिरीक्षक संजय कुमार उनके घर पहुंचे।

उस समय घर में सिर्फ उनकी बूढ़ी माँ, पत्नी और छोटे बच्चे मौजूद थे। पुलिसकर्मियों ने न सिर्फ दिनेश यादव के बारे में अपमानजनक बातें कहीं, बल्कि उनकी माँ से भी दुर्व्यवहार किया और गालियां दीं।

सोशल मीडिया पर वायरल हुई ऑडियो रिकॉर्डिंग में थाना प्रभारी की धमकी साफ सुनी जा सकती है—

"उससे कह देना कि मिल ले, नहीं तो मुर्गा बना दूंगा… जूते से मारूंगा… जेल भेज दूंगा… अगर थाने नहीं भेजा तो 8 महीने तक उसे देख नहीं पाओगी।"

पूर्व सैनिकों में आक्रोश, डीएम और एसपी से शिकायत

इस घटना से पूरे इलाके में रोष फैल गया है। पूर्व सैनिक दिनेश यादव ने अन्य भूतपूर्व सैनिकों के साथ मिलकर डीएम डॉ. दिनेश चंद्र और एसपी डॉ. कौस्तुभ से मुलाकात कर लिखित शिकायत दी। उन्होंने मांग की कि इस घटना की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

दिनेश यादव ने यह मामला राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री, मुख्यमंत्री, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और अन्य उच्च अधिकारियों तक भी पहुंचा दिया है।

भूतपूर्व सैनिकों ने दी आंदोलन की चेतावनी

घटना के विरोध में भूतपूर्व सैनिक कल्याण समिति, जौनपुर के नेतृत्व में पूर्व सैनिकों ने एकजुट होकर प्रशासन को कड़ा संदेश दिया। बैठक में अनिल यादव, कमलेश यादव, सुबाष चंद्र, हवलदार यादव, संतोष कुमार, आशीष कुमार, केके दुबे, भुवनेश्वर मौर्य सहित कई पूर्व सैनिक मौजूद रहे।

उन्होंने साफ कहा कि अगर दोषी पुलिस अधिकारियों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे।

पुलिस ने किया बचाव, लेकिन सवाल जस के तस

इस मामले में जब थाना प्रभारी जफराबाद जय प्रकाश यादव से बात की गई तो उन्होंने आरोपों को निराधार बताया और कहा कि वे किसी अन्य मामले की जांच के लिए गांव गए थे। हालांकि, वायरल ऑडियो और स्थानीय लोगों के बयान पुलिस के दावों को गलत साबित कर रहे हैं।

क्या कानून से ऊपर हो गई पुलिस?

यह घटना एक बड़ा सवाल खड़ा करती है—क्या पुलिस का काम जनता की सुरक्षा करना है या फिर उन्हें डराना-धमकाना? जब पुलिस ही कानून की धज्जियां उड़ाएगी, तो आम जनता न्याय की उम्मीद किससे करेगी?

अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में न्याय करता है या इसे भी दबाने की कोशिश की जाती है।