Jaunpur : शादी से पहले प्रेमिका ने खोली दूल्हे की पोल, लगाया दुष्कर्म और जबरदस्ती गर्भपात का आरोप, फिर...

Jaunpur : खुटहन थाना क्षेत्र के एक गांव में शुक्रवार की रात उस समय हड़कंप मच गया जब शादी से ठीक पहले एक युवती ने दूल्हे पर दुष्कर्म और जबरन गर्भपात कराने का आरोप लगाते हुए उसकी पोल खोल दी। पीड़िता द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के बाद कन्या पक्ष ने बारातियों की आवभगत के बाद उन्हें बिना विवाह के विदा कर दिया और दूल्हे के पिता, चाचा व फूफा को बंधक बना लिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने तीनों को हिरासत में लेकर मामले की पंचायत शुरू कराई।
शादी से पहले सामने आई सच्चाई
जानकारी के अनुसार, गांव निवासी एक व्यक्ति की पुत्री का विवाह सुल्तानपुर जिले के लंभुआ थाना क्षेत्र के वेदूपारा गांव निवासी रामसुख यादव के पुत्र आशीष यादव के साथ तय हुआ था। आशीष एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं। शुक्रवार को बारात पहुंचने से पहले शाम करीब सात बजे एक युवती अपने पिता के साथ गांव में पहुंची। पड़ोसी के घर बैठकर उसने वधू के पिता को बुलवाया और पूरी आपबीती सुनाई।
पीड़िता ने आरोप लगाया कि आशीष पहले उसका प्रेमी था। उसने शादी का झांसा देकर कई बार शारीरिक संबंध बनाए और गर्भवती होने पर जबरन गर्भपात भी कराया। जब वह बेरोजगार था तो शादी के लिए राजी था, लेकिन नौकरी लगने के बाद उसे धमकाने लगा। युवती ने लंभुआ थाने में दर्ज दुष्कर्म समेत विभिन्न धाराओं के मुकदमे की कॉपी भी वधू पक्ष को दिखाई।
पूरा मामला जानने के बाद वधू पक्ष ने शुरुआत में इसे गोपनीय रखा। रात में बारात पहुंचने पर बारातियों का स्वागत कर उन्हें भोजन कराया गया, लेकिन शादी से इनकार कर दिया गया। इसके बाद दूल्हे के पिता रामसुख यादव, चाचा रामसजीवन और फूफा गोविंद प्रसाद को बंधक बना लिया गया। पूछताछ में जब दूल्हे के परिवार से जवाब मांगा गया तो शुरुआत में उन्होंने आरोपों को झूठा बताया, लेकिन मुकदमे की प्रति देखने के बाद चुप्पी साध ली।
दहेज में दिए साढ़े छह लाख रुपये की वापसी की मांग
कन्या पक्ष ने दूल्हे के परिवार से उपहार स्वरूप दिए गए साढ़े छह लाख रुपये की वापसी की मांग की। खाने-पीने के खर्च को छोड़ने की बात कही। सूचना पर पहुंची पुलिस ने तीनों को हिरासत में लिया और थाने पर पंचायत शुरू कराई। वर पक्ष पैसे लौटाने के लिए समय मांग रहा था, लेकिन वधू पक्ष तत्काल नकद धनराशि देने पर अड़ा हुआ था। खबर लिखे जाने तक थाने पर पंचायत जारी थी।
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