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Jaunpur : 96 घंटे से अंधेरे में डूबे कई गांव, आंधी में गिरे खंभे की अबतक नहीं हुई मरम्मत, आरोप- बिजली विभाग ‘फंड’ का बना रहा बहाना

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Jaunpur News : जिले के कोठवार फीडर से जुड़े सुल्तानपुर गौर, हरिहरपुर, लोहता और पतहना मोड़ जैसे दर्जनों गांव बीते 96 घंटे से अंधेरे में डूबे हुए हैं। आंधी-तूफान से गिरे बिजली के खंभे और टूटी हुई तारें अब तक जस की तस पड़ी हैं। इस भीषण गर्मी में न बिजली है, न पानी और न ही मोबाइल चार्ज करने की सुविधा, जिससे ग्रामीण बेहाल हो चुके हैं।

बिजली विभाग की सुस्ती से ग्रामीण परेशान

आपदा के बाद तुरंत मरम्मत कार्य शुरू करने के बजाय, बिजली विभाग ने "फंड न होने" का बहाना बनाकर हाथ खड़े कर दिए हैं। एसडीओ धीरेन्द्र कुमार सिंह ने कहा, “जब तक जिलाधिकारी से आपदा राहत कोष की राशि नहीं मिलती, तब तक मरम्मत संभव नहीं है।”

ग्रामीणों में आक्रोश

गांव के प्रधानों और स्थानीय लोगों ने प्रशासनिक निष्क्रियता पर रोष जताया है। ग्रामीणों ने कहा कि अगर 24 घंटे के भीतर बिजली बहाल नहीं हुई, तो वे सड़क पर उतरकर प्रदर्शन और घेराव करेंगे।

सुल्तानपुर गौर निवासी पंकज ने बताया, “चार दिन से बिजली नहीं है, मोबाइल बंद हैं, पानी भी नहीं आ रहा। विभाग ने साफ कहा – खंभे तभी लगेंगे जब फंड आएगा।”

मंगला यादव ने कहा, “बच्चों की नींद उड़ी हुई है, मच्छरों से परेशान हैं और कोई अधिकारी फोन तक नहीं उठा रहा।”

हरिनाथ, एक अन्य ग्रामीण ने आरोप लगाया, “हर बार आंधी के बाद यही हाल होता है, अधिकारी तब तक नहीं जागते जब तक जनता सड़कों पर न उतरे।”

हरिहरपुर निवासी विशाल ने कहा, “अगर फंड नहीं है तो फिर विभाग किस बात का? क्या जनता को यूं ही अंधेरे में मरने के लिए छोड़ दिया जाएगा?”

कब सुध लेगा प्रशासन?

गौरतलब है कि आपदा राहत कोष से त्वरित सहायता का उद्देश्य आपातकालीन स्थितियों में राहत देना होता है। लेकिन यहां स्थिति यह है कि बिजली विभाग फंड न होने की बात कहकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है।

एसडीओ धीरेन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि फीडर से जुड़े गांवों के मरम्मत कार्य के लिए एस्टीमेट जिलाधिकारी को भेजा गया है, फंड मिलते ही कार्य शुरू होगा।