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यूपी के इस गांव में कई मुस्लिम परिवारों ने बदला अपना सरनेम, कोई शेख अब्दुल्ला से बना दुबे तो कोई बना शुक्ला से तिवारी

यूपी के इस गांव में कई मुस्लिम परिवारों ने बदला अपना सरनेम, कोई शेख अब्दुल्ला से बना दुबे तो कोई बना शुक्ला से तिवारी

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के डेहरी गांव से एक अनोखा मामला सामने आया है, यहां लगभग तीन दर्जन मुस्लिम परिवारों ने अपने पुरखों की पहचान को फिर से अपनाते हुए अपने नामों के आगे हिंदू सरनेम लगाना शुरू कर दिया है। इन परिवारों का कहना है कि उनके पूर्वज ब्राह्मण और क्षत्रिय थे, जिन्होंने कई पीढ़ी पहले धर्म परिवर्तन कर लिया था। अब वे अपनी जड़ों से जुड़ने और अपनी मूल पहचान को फिर से अपनाने के लिए यह कदम उठा रहे हैं।

डेहरी गांव में रहने वाले नौशाद अहमद ने हाल ही में अपने नाम में बदलाव कर लिया है। अब उन्हें नौशाद अहमद दुबे के नाम से जाना जाता है। दिलचस्प बात यह है कि उनके दोस्त उन्हें सालों से "पंडित जी" कहकर बुलाते रहे हैं। नौशाद ने कुछ महीने पहले अपने पूर्वजों के इतिहास की पड़ताल शुरू की, जिससे पता चला कि उनके पूर्वज ब्राह्मण थे। यह जानकारी मिलने के बाद उन्होंने अपने नाम के आगे "दुबे" जोड़ लिया। इसी तरह, शेख अब्दुल्ला ने भी अपने नाम के साथ "दुबे" सरनेम जोड़ लिया है।

बताया जा रहा है कि असम में एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) लागू होने और नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के आने के बाद इन परिवारों ने अपने परिवार के इतिहास की जांच शुरू की। माना जा रहा है कि सीएए और एनआरसी को लेकर बढ़ते डर के कारण इन मुस्लिम परिवारों ने अपनी पहचान में यह बदलाव किया है।

इन लोगों का कहना है कि उनके पूर्वज हिंदू समाज का हिस्सा थे और जब उनकी पहचान ब्राह्मण समाज से जुड़ी मिली, तो उन्होंने अपने पुरखों की याद में यह कदम उठाया। यह बदलाव उनके लिए अपने इतिहास और परिवार की विरासत को सम्मान देने का एक तरीका है।

हालांकि, इन परिवारों ने इस्लाम नहीं छोड़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यह कदम उनकी धार्मिक आस्था को प्रभावित नहीं करता, बल्कि पुरखों की सांस्कृतिक पहचान को सम्मानित करने के लिए है। इस बदलाव का उद्देश्य उनके पुरखों के योगदान को याद रखना और उस इतिहास से खुद को जोड़ना है।