Jaunpur : अरुणाचल प्रदेश में ड्यूटी के दौरान नायब सूबेदार सौरभ यादव का निधन, हार्ट अटैक बना मौत का कारण

Jaunpur News: सिकरारा गांव इटहवा पुरवा निवासी एवं भारतीय थल सेना में नायब सूबेदार पद पर तैनात सौरभ यादव (34) का रविवार को अरुणाचल प्रदेश के डिब्रूगढ़ के एलॉन्ग क्षेत्र में ड्यूटी के दौरान दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। सौरभ की आकस्मिक मृत्यु की सूचना मिलते ही गांव में शोक की लहर दौड़ गई, वहीं परिवार में कोहराम मच गया। गांव में चारों ओर मातम छाया हुआ है। उनका पार्थिव शरीर आज गांव लाए जाने की संभावना है।
आखिरी वक्त तक ड्यूटी पर डटे रहे सौरभ
पारिवारिक सूत्रों के अनुसार रविवार सुबह करीब 10 बजे सौरभ के सहकर्मी ने उनकी पत्नी रेनू को फोन किया और सास से बात करने की बात कही। जैसे ही उन्होंने फोन पर घटना की सूचना दी, सास सुशीला बेहोश होकर गिर पड़ीं। यह सुनकर पत्नी रेनू भी बेसुध हो गईं और पूरे घर में चीख-पुकार मच गई।
चचेरे भाई अजय यादव ने बताया कि सौरभ को सुबह सीने में हल्का दर्द हुआ, तो वह डॉक्टर के पास खुद ही जाने लगे। रास्ते में दर्द बढ़ता गया और सांस लेने में दिक्कत होने लगी। तभी एक साथी ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया। इलाज के दौरान उन्हें दिल का दौरा पड़ा और तमाम कोशिशों के बावजूद डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके।
मिलनसार और साहसी थे सौरभ
सौरभ यादव दो भाइयों में छोटे थे। उनके पिता लालबहादुर यादव ट्रांसपोर्ट का काम करते थे, लेकिन एक दुर्घटना के बाद उन्हें न्यूरो संबंधी समस्या हो गई थी। सौरभ ने ही कई वर्षों तक पिता का इलाज करवाया और उनका ख्याल रखा। वह न सिर्फ परिवार के लिए कमाऊ बेटा थे बल्कि गांव में भी उनकी गिनती मिलनसार और साहसी व्यक्ति के रूप में होती थी।
चंडीगढ़ से शुरू हुआ था सेना का सफर
सौरभ की पहली तैनाती चंडीगढ़ में सिपाही के पद पर हुई थी। इसके बाद उन्हें राजस्थान, बरेली और फिर डिब्रूगढ़ पोस्ट किया गया। यहीं पर उनकी पदोन्नति नायब सूबेदार के पद पर हुई थी। वे हमेशा परिवार से जुड़े रहते थे और रोजाना फोन पर बात करते थे। लेकिन रविवार सुबह जब उनका फोन नहीं आया तो पत्नी को बेचैनी होने लगी। बाद में जो खबर आई, वह पूरे परिवार के लिए असहनीय साबित हुई।
पत्नी और बच्चों की हालत गंभीर
सौरभ की पत्नी रेनू का रो-रोकर बुरा हाल है। वह बार-बार बेहोश हो जा रही हैं। माता-पिता गहरे सदमे में हैं। उनके सात वर्षीय पुत्र हर्षित और चार वर्षीय पुत्री हर्षिता अपनी मां को रोते देख खुद भी बिलख उठते हैं। घर की महिलाओं ने किसी तरह रेनू को संभाल रखा है। वहीं गांव के लोग लगातार उनके घर पहुंचकर श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
इस हृदयविदारक घटना ने पूरे क्षेत्र को शोकाकुल कर दिया है। गांववाले अपने जांबाज सपूत को अंतिम विदाई देने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
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