स्वदेशी सोच से बदलेगा भारत का भविष्य, काशी प्रांत विचार वर्ग में गूंजा आत्मनिर्भरता का मंत्र

राष्ट्रीय सह-संयोजक डॉ. राजीव कुमार ने कहा कि स्वदेशी स्वावलंबन अभियान केवल औपचारिक पहल नहीं बल्कि देश को मजबूत बनाने की व्यापक मुहिम है। उन्होंने ऊर्जा आत्मनिर्भरता, स्वदेशी तकनीक, हरित संसाधनों और विदेशी निर्भरता कम करने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि यही रास्ता भारत को आर्थिक रूप से सशक्त बनाएगा।

उन्होंने कहा कि यदि नई पीढ़ी आत्मनिर्भर सोच को अपनाए तो भारत विश्व अर्थव्यवस्था में नई पहचान बना सकता है। उनके मुताबिक स्वदेशी केवल व्यापार से जुड़ा विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय गौरव और सांस्कृतिक विश्वास का प्रतीक है।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रांत अध्यक्ष डॉ. महेंद्र त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय जीवन पद्धति की जड़ में स्वदेशी भावना बसती है। जब तक यह विचार व्यवहार में नहीं उतरेगा, तब तक वास्तविक आत्मनिर्भरता अधूरी रहेगी।
प्रो. अजय द्विवेदी ने कहा कि भारतीय दृष्टिकोण मानसिक गुलामी से बाहर निकलने की राह दिखाता है। समाज को अपनी भाषा, ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करना चाहिए।
विभाग सह संघचालक प्रो. अविनाश ने भारतीय शोध प्रणाली को मानव केंद्रित बताते हुए कहा कि पश्चिमी मॉडल जहां संसाधनों के अंधाधुंध उपयोग को बढ़ावा देता है, वहीं भारतीय चिंतन संतुलन और संवेदनशीलता की सीख देता है।
मड़ियाहूं पीजी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. सुरेश पाठक ने युवाओं को स्वरोजगार और कौशल आधारित विकास से जोड़ने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यही दिशा देश की वास्तविक ताकत को नई पहचान दे सकती है।
आयोजन के दौरान संस्था की ओर से कई नई घोषणाएं भी की गईं और आने वाले अभियानों की रूपरेखा साझा की गई। इस मौके पर डॉ. अखिलेश त्रिपाठी, डॉ. विजय कुमार सिंह, डॉ. विवेक मिश्र, डॉ. मनोज कुमार पांडेय, अजय आनंद, वेद प्रकाश मिश्र, डॉ. प्रशांत, ममता, उद्देश्य सिंह, आदित्य कुमार समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और गणमान्य लोग मौजूद रहे।
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