महाकुंभ में भगवा वेश विवाद: मॉडल हर्षा रिछारिया को लेकर संत समाज में टकराव, अखाड़ा परिषद ने किया समर्थन

प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ में भगवा वस्त्र पहनने और शाही रथ पर साध्वी वेश में सवार होने को लेकर मॉडल हर्षा रिछारिया विवादों के केंद्र में हैं। जहां शांभवी पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप और अन्य संतों ने इस कदम को सनातन परंपराओं के खिलाफ बताते हुए विरोध जताया, वहीं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रवींद्र पुरी ने हर्षा का समर्थन किया।
शाही रथ पर साध्वी वेश में बैठने पर उठा विवाद
मॉडल हर्षा रिछारिया ने निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि के शाही रथ पर साध्वी वेश में सवारी की, जिसके बाद यह विवाद शुरू हुआ। स्वामी आनंद स्वरूप ने इस घटना को परंपरा का अपमान बताते हुए कैलाशानंद को महाकुंभ से बाहर करने की मांग की। उन्होंने कहा, "जो महिला शादी के करीब है और संन्यास लेने का निर्णय नहीं कर पाई, उसे साध्वी के रूप में प्रचारित करना गलत है।"
अखाड़ा परिषद का समर्थन
विवाद के बीच, अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रवींद्र पुरी ने हर्षा का समर्थन करते हुए कहा, "भगवा वस्त्र पहनना केवल संतों या संन्यासियों तक सीमित नहीं है। महाकुंभ में सनातन धर्म को समझने के लिए आने वाले युवाओं को प्रोत्साहित करना चाहिए।" उन्होंने हर्षा को अपनी बेटी समान बताते हुए उनके भगवा वस्त्र पहनने पर किसी भी आपत्ति को अनुचित बताया।
मां ने जताई आपत्ति
हर्षा की मां किरन रिछारिया ने भी बेटी के संन्यास लेने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, "अगले महीने हर्षा की शादी होने वाली है। मैं जीते जी उसे संन्यास नहीं लेने दूंगी।"
महाकुंभ में जारी रहेगा विवाद?
साध्वी वेश में हर्षा की मौजूदगी ने संत समाज में मतभेद बढ़ा दिए हैं। जहां एक ओर कुछ संत इसे परंपरा का उल्लंघन मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इसे युवाओं को सनातन धर्म की ओर आकर्षित करने का प्रयास बताया जा रहा है। इस विवाद से महाकुंभ के संत समाज में खलबली मच गई है।
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