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रोते-बिलखते छोड़ा था महाकुंभ...वापस लौटीं मॅाडल हर्षा रिछारिया, कहा- मेरी वजह से आ रहें युवा

रोते-बिलखते छोड़ा था महाकुंभ...वापस लौटीं मॅाडल हर्षा रिछारिया, कहा- मेरी वजह से आ रहें युवा

Harsha Richhariya Mahakumbh : प्रयागराज महाकुंभ में सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर और एंकर हर्षा रिछारिया (Harsha Richhariya) ने एक बड़ा कदम उठाया है। कुछ समय पहले महाकुंभ (Mahakumbh 2025) छोड़ने के बाद फिर से वापस लौट आई है। हर्षा ने कहा कि वह इस बार महाकुंभ में युवाओं को सनातन धर्म से जोड़ने के उद्देश्य से आई हैं। उनका मानना है कि उनकी उपस्थिति से युवा महाकुंभ में आ रहे हैं, और अगर वह नहीं आतीं, तो युवा भी इससे दूर रहते।

प्रयागराज महाकुंभ में वापस आईं हर्षा रिछारिया (Harsha Richhariya) ने कहा कि वह पहले वापस जा रही थीं, लेकिन फिर उन्होंने युवाओं को धर्म से जोड़ने के उद्देश्य से वापसी का निर्णय लिया। हर्षा ने कहा, "आजकल के युवा धर्म से दूर हो गए हैं और उनके पास धर्म और अध्यात्म के बारे में कोई जानकारी नहीं है। इसलिए मैं चाहती हूं कि युवा वर्ग धर्म और अध्यात्म की दिशा में आए, ताकि वे हमारी संस्कृति को न भूलें और आने वाली पीढ़ी को भी हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर का ज्ञान हो।"

रोते-बिलखते छोड़ा था महाकुंभ...वापस लौटीं मॅाडल हर्षा रिछारिया, कहा- मेरी वजह से आ रहें युवा

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उन्होंने यह भी बताया, "मेरे वापस जाने पर लोग सोशल मीडिया पर महाकुंभ से न जाने की बात कह रहे थे। उनका कहना था कि अगर मैं धर्म की ओर नहीं आऊं, तो वे कैसे जागरूक होंगे? इसीलिए मैंने महाकुंभ में वापस आने का फैसला किया।" हर्षा ने कहा कि निरंजनी अखाड़े के महंत और अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रविन्द्रपुरी जी उनके लिए पिता समान हैं और उनका आशीर्वाद उनके साथ है। "महाराज जी का हाथ मेरे सिर पर है, इसलिए मुझे किसी और चीज की आवश्यकता नहीं है। मैं महाराज जी की बेटी की तरह हूं और यहां धर्म को समझने, अपनाने और युवाओं को धर्म के प्रति जागरूक करने आई हूं।"

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हर्षा रिछारिया, जो पहले महाकुंभ में भगवा वस्त्र पहनकर और महामंडलेश्वर के रथ पर सवार होकर विवादों का हिस्सा बनी थीं, ने अपनी वापसी को लेकर एक नया संदेश दिया है। जब उनकी तस्वीरें और वीडियो वायरल हुए थे, तब कई संतों ने इसका विरोध किया था, जिनमें ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और शांभवी पीठाधीश्वर आनंद स्वरुप शामिल थे। संतों ने यह कहा था कि महाकुंभ में इस तरह की परंपराओं का पालन करना गलत है, और हमें बाहरी सुंदरता के बजाय हृदय की सुंदरता को महत्व देना चाहिए।

रोते-बिलखते छोड़ा था महाकुंभ...वापस लौटीं मॅाडल हर्षा रिछारिया, कहा- मेरी वजह से आ रहें युवा

हर्षा रिछारिया, जो महाकुंभ में विवादों के कारण रोते हुए वहां से चली गई थीं, महज 48 घंटे के भीतर फिर से निरंजनी अखाड़े में नजर आईं। उन्होंने इस बार महाकुंभ में युवाओं के बीच सनातन धर्म की महिमा फैलाने का संकल्प लिया है।