मिल्कीपुर उपचुनाव : भाजपा का पासी कार्ड, सपा को कड़ी टक्कर देने की रणनीति

Milkipur By Election: मिल्कीपुर उपचुनाव में भाजपा ने जातीय समीकरण साधने के लिए पासी समाज पर दांव खेला है। पार्टी ने चंद्रभानु पासवान को उम्मीदवार बनाकर सपा सांसद अवधेश प्रसाद (Avdesh Prasad) के प्रभाव को चुनौती देने की कोशिश की है। भाजपा का यह फैसला सपा के "अयोध्या न काशी, अबकी बार चलेगा पासी" नारे के जवाब में देखा जा रहा है।
जातीय समीकरण साधने की रणनीति
भाजपा ने सर्वे के आधार पर चंद्रभानु पासवान को चुना, जिनकी छवि निर्विवाद और युवाओं के बीच प्रभावी मानी जाती है। दलित मतदाता, खासकर पासी समाज, मिल्कीपुर सीट पर निर्णायक भूमिका निभाते हैं। चंद्रभानु को मैदान में उतारकर भाजपा ने युवा और दलित वर्ग को साधने की कोशिश की है।
सपा के गढ़ में सेंध लगाने की चुनौती
मिल्कीपुर सीट सपा का गढ़ मानी जाती है। 1991 से अब तक भाजपा को यहां सिर्फ दो बार जीत मिली है। भाजपा के लिए यह उपचुनाव इसलिए भी अहम है क्योंकि लोकसभा चुनाव में अयोध्या सीट हारने के बाद पार्टी को इस क्षेत्र में मजबूती चाहिए।
अंदरूनी कलह और विपक्षी हमले
भाजपा को टिकट बंटवारे के बाद असंतोष और विपक्ष के "संविधान बदलने और आरक्षण खत्म करने" जैसे आरोपों से निपटना होगा। हालांकि, पार्टी ने गोरखनाथ बाबा जैसे वरिष्ठ नेताओं के समर्थन का भरोसा जताया है।
अंतिम समय में बदला फैसला
सूत्रों के मुताबिक, सुरेंद्र रावत की दावेदारी अंतिम समय में कट गई। माना जा रहा है कि पार्टी उन्हें किसी अन्य महत्वपूर्ण पद पर समायोजित करेगी।
चुनाव में मतदाताओं की जातीय संरचना
मिल्कीपुर में कुल 3.5 लाख मतदाता हैं, जिनमें 55 हजार पासी, 1.2 लाख अन्य दलित, 55 हजार यादव, 60 हजार ब्राह्मण, 30 हजार मुस्लिम, 25 हजार क्षत्रिय, और 50 हजार अन्य पिछड़ी जातियां शामिल हैं।
भाजपा और सपा के बीच यह उपचुनाव जातीय समीकरणों और युवा मतदाताओं को साधने की लड़ाई बनता दिख रहा है।
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