1. Home
  2. राष्ट्रीय

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राहुल गांधी की नागरिकता रद्द करने वाली याचिका की खारिज, जानें पूरा मामला

Rahul Gandhi

Rahul Gandhi Citizenship Dispute Case Rejected: कांग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की नागरिकता को चुनौती देने वाली नई याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा है कि वे पहले दायर याचिका पर ही पुनर्विचार के लिए अर्जी लगाएं।

क्या है मामला?

भाजपा नेता विग्नेश शिशिर ने 5 मई को कोर्ट में दायर याचिका में दावा किया था कि राहुल गांधी ब्रिटिश नागरिक हैं। हाईकोर्ट ने उस समय मामले को बंद करते हुए कहा था कि केंद्र सरकार इस पर कोई ठोस रिपोर्ट नहीं दे पाई है। लेकिन इसी विषय को लेकर विग्नेश ने 8 मई को एक नई याचिका दाखिल की, जिसमें कुछ नए दस्तावेज और तथ्यों के आधार पर राहुल की नागरिकता पर फिर से सवाल उठाए गए।

कोर्ट ने याचिका क्यों खारिज की?

जस्टिस एआर मसूदी और जस्टिस अजय कुमार श्रीवास्तव (I) की खंडपीठ ने बुधवार को मामले पर पहली सुनवाई की और कहा कि नई याचिका की जरूरत नहीं है, पहली याचिका को ही पुनर्जीवित कर पुनर्विचार के लिए प्रस्तुत किया जाए।

याचिकाकर्ता की मुख्य मांगें

विग्नेश शिशिर ने कोर्ट से मांग की थी कि:

  • राहुल गांधी की विदेश यात्रा पर तत्काल रोक लगाई जाए।

  • उनकी भारतीय नागरिकता रद्द की जाए।

  • उनके खिलाफ पासपोर्ट एक्ट 1967 की धारा 12 के तहत एफआईआर दर्ज की जाए, क्योंकि उन्होंने कथित रूप से फर्जी जानकारी देकर भारतीय पासपोर्ट प्राप्त किया है।

केंद्र से रिपोर्ट की मांग

याचिकाकर्ता ने कहा कि गृह मंत्रालय ने ब्रिटेन, वियतनाम और उज्बेकिस्तान सरकारों से राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर रिपोर्ट मंगाई है। कुछ वीडियो, फोटो और दस्तावेज पहले ही मंत्रालय को सौंपे जा चुके हैं। दावा है कि रिपोर्ट आ चुकी है और सरकार उसके आधार पर निर्णय लेने की प्रक्रिया में है। हालांकि, कोर्ट में अब तक यह रिपोर्ट पेश नहीं की गई है।

पिछली सुनवाई में क्या हुआ था?

  • 21 अप्रैल को कोर्ट ने केंद्र की स्थिति रिपोर्ट को अपर्याप्त बताते हुए सख्त टिप्पणी की थी:
    “यह मामला राष्ट्रीय महत्व का है, इसमें देरी नहीं चलेगी।”
    कोर्ट ने केंद्र से पूछा था कि “क्या राहुल गांधी भारतीय नागरिक हैं? इसका जवाब 10 दिन में दीजिए।”

  • 5 मई को कोर्ट ने कहा था कि सिर्फ रिपोर्ट के इंतजार में केस को लंबित नहीं रखा जा सकता। जब रिपोर्ट आएगी, याचिकाकर्ता को उसकी प्रति दी जाए और वह पुनः कोर्ट आ सकता है।

हैरानी की बात यह रही कि इन दोनों सुनवाइयों में राहुल गांधी की ओर से कोई वकील कोर्ट में मौजूद नहीं था। वहीं, कांग्रेस पार्टी की तरफ से भी अब तक इस मसले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।