1. Home
  2. राष्ट्रीय

Cockroach Janta Party का X अकाउंट भारत में बंद, CJI के बयान के विरोध में हुई थी शुरू

Cockroach Janta Party

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के एक बयान के विरोध में शुरू हुई ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) का एक्स अकाउंट बंद कर दिया गया है। पिछले कुछ दिनों से यह ऑनलाइन अभियान सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में था। एक्स पर पार्टी का अकाउंट खोलने पर अब संदेश दिखाई दे रहा है कि “लीगल डिमांड” के चलते अकाउंट को भारत में विथहेल्ड कर दिया गया है।

पार्टी के संस्थापक Abhijeet Deepke ने दावा किया है कि पहले अकाउंट को हैक करने की कोशिश की गई थी। जब हैकिंग में सफलता नहीं मिली तो अकाउंट को बंद करा दिया गया।

बताया जा रहा है कि एक्स पर इस अकाउंट के 1.6 लाख से अधिक फॉलोवर्स थे, जबकि इंस्टाग्राम पर इसके फॉलोवर्स की संख्या 13 मिलियन से ज्यादा पहुंच चुकी है।

कैसे शुरू हुआ CJP अभियान?

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम से यह ऑनलाइन अभियान 16 मई को शुरू हुआ था। दरअसल, भारत के मुख्य न्यायाधीश Surya Kant ने कथित तौर पर कुछ बेरोजगार युवाओं के रवैये को लेकर “कॉकरोच” शब्द का इस्तेमाल किया था।

इसी बयान के विरोध में अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर लिखा कि “क्या हो अगर सारे कॉकरोच इकट्ठा हो जाएं?” इसके बाद देखते ही देखते “Cockroach Janata Party” नाम से ऑनलाइन कैंपेन शुरू हो गया और बड़ी संख्या में लोग इससे जुड़ने लगे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब छह लाख लोगों ने इस अभियान के लिए खुद को रजिस्टर भी किया है। सोशल मीडिया पर इस अभियान को कई बड़े नेताओं और सेलिब्रिटीज का भी फॉलो मिल रहा है।

कौन हैं अभिजीत दीपके?

30 वर्षीय अभिजीत दीपके महाराष्ट्र के Pune के रहने वाले हैं। उन्होंने पत्रकारिता में ग्रेजुएशन करने के बाद अमेरिका की Boston University से पब्लिक रिलेशंस में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।

वर्तमान में वह एक पॉलिटिकल कम्युनिकेशन स्ट्रैटजिस्ट के तौर पर काम करते हैं और राजनीतिक दलों के लिए डिजिटल रणनीति तैयार करते हैं।

CJP की प्रमुख मांगें

कॉकरोच जनता पार्टी की वेबसाइट भी लाइव बताई जा रही है और पार्टी ने अपना मेनिफेस्टो भी जारी किया है। इसमें कई राजनीतिक और संवैधानिक मांगें रखी गई हैं।

इनमें मुख्य रूप से:

  • चीफ जस्टिस को रिटायरमेंट के बाद राज्यसभा न भेजने की मांग
  • संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण
  • दल बदलने वाले सांसदों और विधायकों पर 20 साल तक चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध
    जैसी मांगें शामिल हैं।

फिलहाल सोशल मीडिया पर इस पूरे मामले को लेकर बहस तेज है और लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, डिजिटल एक्टिविज्म और राजनीतिक व्यंग्य से जोड़कर देख रहे हैं।