भारत-PAK सीजफायर के ऐलान पर बोले विदेश सचिव विक्रम मिसरी, ट्रंप हमसे पूछकर बीच में नहीं कूदे वो अचानक...

नई दिल्ली: विदेश सचिव विक्रम मिसरी (Vikram Misri) ने सोमवार को संसद की विदेश मामलों पर स्थायी समिति को भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव को लेकर ब्रीफ किया। यह टकराव हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद तेज हुआ था। बैठक में समिति के कई सदस्यों ने अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस ट्वीट को लेकर भी सवाल उठाए, जिसमें उन्होंने संघर्ष विराम में अपनी भूमिका का दावा किया था।
"ट्रंप ने नहीं ली इजाजत, सीधे कूद पड़े" – मिसरी
विदेश सचिव ने स्पष्ट कहा कि संघर्षविराम का निर्णय भारत और पाकिस्तान के बीच आपसी बातचीत के बाद हुआ था। उन्होंने कहा, “ट्रंप हमसे पूछकर बीच में नहीं आए थे। वो अचानक कूद पड़े, तो हम क्या कर सकते थे?” सरकार की ओर से दो टूक कहा गया कि यह एक द्विपक्षीय मुद्दा था, जिसमें किसी तीसरे देश की कोई भूमिका नहीं थी।
"सीजफायर का निर्णय आपसी सहमति से हुआ"
डोनाल्ड ट्रंप ने पहले दावा किया था कि उनके प्रशासन ने भारत-पाक टकराव रोकने में मदद की है। हालांकि, बाद में उन्होंने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा कि वह मध्यस्थ नहीं बने बल्कि उन्होंने सिर्फ समाधान के लिए समर्थन दिया था।
विदेश सचिव ने दोहराया कि भारत ने किसी बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं किया और यह फैसला दोनों देशों के बीच आपसी समझ के तहत लिया गया।
सांसदों ने पूछे तीखे सवाल
शशि थरूर की अध्यक्षता में हुई इस समिति की बैठक में विभिन्न दलों के सांसद शामिल हुए, जिनमें तृणमूल कांग्रेस के अभिषेक बनर्जी, कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला और दीपेंद्र हुड्डा, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और बीजेपी की अपराजिता सारंगी व अरुण गोविल भी मौजूद थे।
“पाकिस्तान में बेखौफ घूम रहे आतंकवादी” – विदेश सचिव
बैठक में यह मुद्दा भी उठा कि भारत बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य में अपनी विदेश नीति को कैसे ढाल रहा है। विदेश सचिव ने इस पर चिंता जताई कि पाकिस्तान में संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकी खुलेआम घूम रहे हैं और भारत के खिलाफ हिंसा भड़काने की साजिशें कर रहे हैं।
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