Gyanvapi Case : 6 महीने में निपटारा होना था 'लॉर्ड विश्वेश्वर' मामला, 16 महीने बाद भी अधर में लटका

Gyanvaphi Case : वाराणसी के बहुचर्चित ज्ञानवापी प्रकरण में दाखिल ‘लॉर्ड विश्वेश्वर’ केस को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 दिसंबर 2023 को इस ऐतिहासिक केस को छह महीने के भीतर निस्तारित करने का आदेश दिया था। लेकिन छह महीने की सीमा बीत चुकी है और अब 16 महीने बाद भी मामला अधर में लटका हुआ है।
मामले की सुनवाई एक बार फिर सोमवार को सिविल जज (सीनियर डिवीजन/फास्ट ट्रैक कोर्ट) की अदालत में होनी है। लेकिन अदालत द्वारा समयसीमा में फैसला न दे पाने के पीछे कई कानूनी अड़चनें और पक्षकारों की नई-नई अर्जियां प्रमुख वजह मानी जा रही हैं।
क्या है 'लॉर्ड विश्वेश्वर' केस?
यह मुकदमा 15 अक्टूबर 1991 को दाखिल हुआ था। इसमें कहा गया कि ज्ञानवापी परिसर में स्थित स्वयंभू ज्योतिर्लिंग ‘लॉर्ड विश्वेश्वर’ की मूर्ति प्राचीन काल से वहां स्थापित है और हिंदू पक्ष को वहां पूजा-पाठ, राग-भोग जैसे धार्मिक अधिकार मिलने चाहिएं। यह दावा करते हुए उस समय तीन वादी — पंडित सोमनाथ व्यास, रामरंग शर्मा और हरिहर पांडेय — अदालत पहुंचे थे, जिनका अब निधन हो चुका है।
अक्तूबर 2019 में इस केस की ओर से वाद मित्र के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी को नियुक्त किया गया। उनके अनुसार, वर्ष 2019 से पहले मुकदमे में ठहराव था, लेकिन उसके बाद कानूनी प्रक्रिया ने गति पकड़ी। हाईकोर्ट ने भी यह निर्देश दिया कि मुकदमे को छह महीने में समाप्त किया जाए।
विलंब के कारण: लगातार अर्जियां और पक्षकार बनने की कोशिशें
अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी के अनुसार, हाल के वर्षों में विभिन्न व्यक्तियों ने खुद को पक्षकार बनाने की मांग करते हुए अर्जियां दी हैं। यहां तक कि वाद मित्र को हटाने की भी मांग की गई। इन अर्जियों पर सुनवाई और फैसलों की प्रक्रिया में कोर्ट का बहुमूल्य समय खर्च हुआ, जिससे केस का निस्तारण लगातार टलता गया।
उन्होंने बताया कि अदालत ने भी यह स्पष्ट किया है कि अब इस मुकदमे का निस्तारण जल्द संभव नहीं है। इस वजह से अब इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है, जिसमें निवेदन किया गया है कि केस की सुनवाई हाईकोर्ट में ही की जाए।
ASİ सर्वे रिपोर्ट पर भी नहीं हुई सुनवाई
ज्ञानवापी विवाद से संबंधित एएसआई की बहुप्रतीक्षित सर्वे रिपोर्ट 18 दिसंबर 2023 को तत्कालीन जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत में पेश की गई थी। लेकिन आज तक इस रिपोर्ट पर कोई विस्तृत चर्चा अदालत में नहीं हो सकी है। इससे जुड़े एक अन्य महत्वपूर्ण केस — माँ श्रृंगार गौरी की पूजा-पाठ से जुड़ा मामला, जो 2021 में दाखिल हुआ था — वह भी अब तक निस्तारित नहीं हो पाया है।
सभी मुकदमों की हाईकोर्ट में एक साथ सुनवाई की मांग
हिंदू पक्ष की ओर से पेश अधिवक्ता अनुपम द्विवेदी ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है। इसमें आग्रह किया गया है कि ज्ञानवापी विवाद से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक साथ की जाए। यह याचिका भी मौजूदा देरी का एक कारण बन गई है।
क्या कहती है अदालत?
वाराणसी की अदालत ने उच्च न्यायालय को सूचित कर दिया है कि मौजूदा हालात को देखते हुए ‘लॉर्ड विश्वेश्वर’ केस का समयबद्ध निस्तारण संभव नहीं है। अब यह देखना होगा कि हाईकोर्ट इस पर क्या निर्णय लेता है — क्या यह मामला आगे भी स्थानीय अदालत में चलेगा या सीधे उच्च न्यायालय में सुनवाई होगी।
राजनीतिक और धार्मिक दृष्टिकोण से संवेदनशील
ज्ञानवापी प्रकरण न केवल एक धार्मिक बल्कि राजनीतिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत संवेदनशील मामला है। इसमें हो रही देरी पर विभिन्न सामाजिक संगठनों और पक्षकारों ने चिंता व्यक्त की है। अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों पर टिकी हैं।
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