Mann Ki Baat: आजादी की लड़ाई से लेकर पहलगाम के हमलावरों को कड़ी सजा दिलाने तक, जानिए PM Modi के संबोधन की अहम बातें

Mann Ki Baat : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को 'मन की बात' कार्यक्रम के 121वें एपिसोड में देशवासियों को संबोधित किया। अपने संदेश में उन्होंने हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले पर गहरी संवेदना जताई और हमलावरों को कड़ी सजा दिलाने का भरोसा दिलाया। साथ ही, उन्होंने इसरो के पूर्व प्रमुख डॉ. के. कस्तूरीरंगन को श्रद्धांजलि दी और देश की वैज्ञानिक, मानवीय और पर्यावरणीय उपलब्धियों को भी रेखांकित किया। आइए एक नजर डालते है पीएम मोदी के मन की बात कार्यक्रम की अहम व बड़ी बातों पर...
पहलगाम आतंकी हमले पर प्रधानमंत्री का कड़ा संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को आहत किया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पीड़ित परिवारों को न्याय जरूर मिलेगा और हमले के पीछे जो भी साजिशकर्ता हैं, उन्हें कठोरतम सजा दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की एकजुटता उसकी सबसे बड़ी ताकत है। देश के कोने-कोने से लोग एक स्वर में आतंक के खिलाफ अपनी आवाज उठा रहे हैं।
कश्मीर में हो रहे सकारात्मक बदलाव से घबराए आतंकी
पीएम मोदी ने बताया कि जम्मू-कश्मीर में शांति लौटने, स्कूलों-कॉलेजों में गतिविधियां बढ़ने, विकास कार्यों के तेज होने और पर्यटन में रिकॉर्ड वृद्धि से आतंकी बौखला गए हैं। इसी प्रगति से परेशान होकर उन्होंने इस कायराना हमले को अंजाम दिया।
दुनिया भर से भारत को मिला समर्थन
प्रधानमंत्री ने बताया कि दुनिया भर के नेताओं ने इस हमले की निंदा की और भारत के साथ एकजुटता दिखाई है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारत आतंक के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेगा और दोषियों को सजा दिलाएगा।
डॉ. के. कस्तूरीरंगन को श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री ने इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ. के. कस्तूरीरंगन को श्रद्धांजलि दी और उनके योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि डॉ. कस्तूरीरंगन ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम और नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के निर्माण में अहम भूमिका निभाई थी। उनके प्रयासों ने भारत को वैश्विक अंतरिक्ष महाशक्ति बनाने में मदद की।
भारत की अंतरिक्ष यात्रा और नवाचार की कहानी
पीएम मोदी ने गर्व से बताया कि भारत ने एक साथ 104 सैटेलाइट्स लॉन्च कर रिकॉर्ड बनाया है, चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव तक पहुंचा है और अब सूर्य के अध्ययन के लिए आदित्य एल1 मिशन भी भेजा है।
उन्होंने बताया कि अब भारत में 350 से ज्यादा अंतरिक्ष स्टार्टअप्स काम कर रहे हैं, जो इस क्षेत्र में नई संभावनाओं को जन्म दे रहे हैं।
मानवता की सेवा में भारत
प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत ने म्यांमार में भूकंप प्रभावितों के लिए 'ऑपरेशन ब्रह्मा' चलाया, अफगानिस्तान और नेपाल में दवाइयां और टीके भेजे। इथोपिया में भारतीय समुदाय द्वारा जन्मजात दिल की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को भारत इलाज के लिए भेजने के प्रयासों की भी सराहना की।
'सचेत एप' से आपदा प्रबंधन में बढ़ेगी सुरक्षा
पीएम मोदी ने 'सचेत' एप के बारे में जानकारी दी, जिसे राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने विकसित किया है। यह एप बाढ़, भूकंप, तूफान जैसी आपदाओं के समय अलर्ट जारी करता है और क्षेत्रीय भाषाओं में भी उपलब्ध है।
पिछड़े इलाकों में भी विज्ञान का उजाला
प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा के विज्ञान केंद्र की सराहना की, जहां बच्चे विज्ञान में रुचि लेकर नई खोजें कर रहे हैं। उन्होंने गुजरात विज्ञान केंद्र के अनुभव भी साझा किए और कहा कि विज्ञान और नवाचार की बढ़ती रुचि भारत को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।
'एक पेड़ मां के नाम' अभियान की सफलता
पीएम मोदी ने बताया कि 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत एक साल में देशभर में 140 करोड़ से ज्यादा पेड़ लगाए गए हैं। उन्होंने सभी से अपील की कि 5 जून, विश्व पर्यावरण दिवस पर इस अभियान से जुड़कर धरती मां के प्रति अपना प्रेम व्यक्त करें।
गुजरात में हरियाली और जल संरक्षण की उपलब्धियां
प्रधानमंत्री ने बताया कि अहमदाबाद में पिछले कुछ वर्षों में 70 लाख से ज्यादा पेड़ लगाए गए हैं। इस हरियाली ने न सिर्फ शहर का तापमान कम किया है, बल्कि साबरमती रिवरफ्रंट और झीलों के पुनर्निर्माण ने जल निकायों की संख्या भी बढ़ाई है।
कर्नाटक में मैदानों में उगाए जा रहे सेब
पीएम मोदी ने कर्नाटक के बागलकोट के किसान श्रीशैल तेली का उदाहरण दिया, जिन्होंने मैदानों में सेब की खेती कर नई मिसाल कायम की है। उनकी मेहनत ने यह साबित किया कि प्रयोगशीलता से खेती में भी चमत्कार किए जा सकते हैं।
चंपारण सत्याग्रह की प्रेरणादायक कहानी
प्रधानमंत्री ने 1917 के चंपारण सत्याग्रह का जिक्र किया, जहां महात्मा गांधी ने किसानों के हक की लड़ाई लड़ी थी। इस आंदोलन ने आजादी की लड़ाई में नई ऊर्जा भरी थी। पीएम मोदी ने युवाओं से आग्रह किया कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा लिखी गई किताब 'सत्याग्रह इन चंपारण' जरूर पढ़ें।
.webp)
