मानसून तोड़ेगा 35 साल का रिकॉर्ड! IMD ने बताया कब देगा दस्तक

इससे पहले साल 1990 में दक्षिण-पश्चिम मानसून 18 मई को केरल पहुंचा था, जो अब तक सबसे जल्दी आगमन माना जाता है।
अगले 24 घंटे में और आगे बढ़ सकता है मानसून
IMD के अनुसार अगले 24 घंटों में मानसून दक्षिणी बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ सकता है। इसके साथ ही पश्चिमी तट के दक्षिणी इलाकों में 28 मई तक भारी बारिश की संभावना जताई गई है।
पिछले साल यानी 2025 में मानसून 24 मई को केरल पहुंचा था। हालांकि मौसम विभाग ने साफ किया है कि मानसून का जल्दी आना हमेशा ज्यादा बारिश का संकेत नहीं होता।
जल्दी आने वाला मानसून कमजोर भी पड़ सकता है
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि कई बार जल्दी आने वाला मानसून कमजोर भी साबित हुआ है। स्काईमेट वेदर के मौसम वैज्ञानिक Mahesh Palawat ने कहा कि मानसून की कुल बारिश इस बात पर निर्भर करती है कि मौसम तंत्र कितने सक्रिय होते हैं और निम्न दबाव के क्षेत्र कितनी बार बनते हैं।
उन्होंने कहा कि इस साल प्रशांत महासागर से मिल रहे संकेत अल नीनो की स्थिति बनने की ओर इशारा कर रहे हैं, जिसका असर मानसून पर पड़ सकता है।
अल नीनो को लेकर बढ़ी चिंता
अमेरिकी जलवायु पूर्वानुमान केंद्र और National Oceanic and Atmospheric Administration (NOAA) ने भी अल नीनो के उभरने की संभावना जताई है। वैज्ञानिकों के मुताबिक मई से जुलाई के बीच अल नीनो बनने की 82 प्रतिशत संभावना है और यह साल के अंत तक मजबूत स्तर तक पहुंच सकता है।
NOAA के अनुसार सितंबर से नवंबर के बीच अल नीनो के मजबूत या बेहद मजबूत होने की संभावना 50 प्रतिशत से ज्यादा है। आमतौर पर अल नीनो का असर भारत में मानसून की बारिश पर पड़ता है और कई इलाकों में सामान्य से कम वर्षा हो सकती है।
कहां होगी ज्यादा और कहां कम बारिश?
IMD के पूर्वानुमान के अनुसार देश के ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। हालांकि उत्तर-पूर्व भारत, उत्तर-पश्चिम भारत और दक्षिणी प्रायद्वीपीय क्षेत्रों के कुछ हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश की संभावना जताई गई है।
मौसम विभाग इस महीने के आखिर तक मानसून को लेकर दूसरा विस्तृत पूर्वानुमान भी जारी कर सकता है।
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