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सोनिया गांधी और पप्पू यादव के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस, राष्ट्रपति पर विवादित टिप्पणी को लेकर सियासी घमासान

सोनिया गांधी और पप्पू यादव के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस, राष्ट्रपति पर विवादित टिप्पणी को लेकर सियासी घमासान

नई दिल्ली: राष्ट्रपति के अभिभाषण पर की गई विवादित टिप्पणियों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसदों ने कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी और निर्दलीय सांसद पप्पू यादव के खिलाफ संसदीय विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है। भाजपा सांसदों का आरोप है कि दोनों नेताओं ने राष्ट्रपति के खिलाफ आपत्तिजनक और अपमानजनक शब्दों का प्रयोग कर संसद के नैतिक आचरण और विशेषाधिकारों का उल्लंघन किया है।

क्या है मामला?

राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने संसद परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए राष्ट्रपति के बारे में कहा, "वह अपने संबोधन के आखिर तक थक गई थीं और बहुत मुश्किल से बोल पा रही थीं, बेचारी।" वहीं, पप्पू यादव ने अपने बयान में राष्ट्रपति के अभिभाषण को "प्रेम पत्र" कहा और आरोप लगाया कि राष्ट्रपति केवल "स्टांप" के रूप में कार्य कर रही हैं, जिनका काम सिर्फ "लव लेटर पढ़ना" है।

भाजपा सांसदों ने इन बयानों को न केवल राष्ट्रपति पद की गरिमा के खिलाफ बताया बल्कि इसे संसद के नैतिक मानकों और विशेषाधिकारों का गंभीर उल्लंघन भी करार दिया है।

भाजपा सांसदों की प्रतिक्रिया:

भाजपा सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति को ज्ञापन सौंपते हुए कहा, "हम सोनिया गांधी और पप्पू यादव की हालिया असंसदीय, अपमानजनक टिप्पणियों पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हैं। इन टिप्पणियों से सर्वोच्च संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंची है, जिस पर गंभीरता से विचार कर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।"

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "देश के आदिवासी सांसदों ने इस मुद्दे को बहुत गंभीरता से लिया है। लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति के समक्ष मामला उठाया गया है। सोनिया गांधी द्वारा राष्ट्रपति को 'बेचारी महिला' और 'थकी हुई' कहना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। पप्पू यादव के 'प्रेम पत्र' वाले बयान ने भी राष्ट्रपति पद का अपमान किया है।"

क्या हो सकती है कार्रवाई?

विशेषाधिकार हनन का मामला संसद के दोनों सदनों के अध्यक्षों के पास भेजा गया है। यदि मामला विशेषाधिकार समिति के पास जाता है और दोष सिद्ध होता है, तो दोनों नेताओं के खिलाफ संसदीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। इसमें माफी मांगने से लेकर निलंबन तक के विकल्प हो सकते हैं।

कांग्रेस और पप्पू यादव की सफाई:

इस पूरे विवाद पर कांग्रेस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन पार्टी सूत्रों के अनुसार, सोनिया गांधी के बयान को "राजनीतिक रूप से तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है"। वहीं पप्पू यादव ने भी अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा कि "उनकी टिप्पणी का उद्देश्य किसी का अपमान करना नहीं था, बल्कि यह सरकार की नीतियों पर कटाक्ष था।"

राजनीतिक माहौल गरमाया:

राष्ट्रपति के खिलाफ विवादित टिप्पणियों ने संसद के भीतर और बाहर सियासी तापमान बढ़ा दिया है। भाजपा इसे राष्ट्रपति पद की गरिमा का मामला बता रही है, वहीं विपक्ष इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में रखकर देख रहा है। अब देखना दिलचस्प होगा कि संसद की विशेषाधिकार समिति इस मामले में क्या रुख अपनाती है और आगे की कार्रवाई किस दिशा में बढ़ती है।