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Padma Award 2025 : राम मंदिर और काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के मुहूर्तकर्ता पंडित गणेश्वर शास्त्री द्राविड़ पद्मश्री से सम्मानित, कहा- जीवन में कभी...

Padma Award 2025 : राम मंदिर और काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के मुहूर्तकर्ता पंडित गणेश्वर शास्त्री द्राविड़ पद्मश्री से सम्मानित, कहा- जीवन में कभी...

Padma Award 2025 : साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में अपने अद्वितीय योगदान के लिए ज्योतिषाचार्य पंडित गणेश्वर शास्त्री द्राविड़ (Pandit Gadeshwer Shastri) को इस वर्ष पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। पंडित द्राविड़ ने अयोध्या में राम मंदिर शिलान्यास, रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा, और काशी विश्वनाथ कॉरिडोर जैसे ऐतिहासिक और धार्मिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त निकाला। इसके साथ ही, उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नामांकन का भी मुहूर्त तय किया था और उनके प्रस्तावक भी रहे।

धार्मिक और ज्योतिषीय योगदान:

पंडित गणेश्वर शास्त्री का जन्म 9 दिसंबर 1958 को काशी के रामनगर में हुआ। वे अपने तपस्वी जीवन और गहन शास्त्रज्ञान के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्होंने रामेश्वर जाकर रामसेतु की सुरक्षा के लिए विशेष आराधना की और सेतु बंधन जयवीर आग्नेय मंदिर का पता लगाया। वे सांग्वेद विद्यालय के संचालक हैं और धर्म, ज्योतिष, तथा शास्त्रों के समन्वय में महारत रखते हैं।

पारिवारिक और गुरु परंपरा:

पंडित गणेश्वर शास्त्री द्राविड़ के पिता पंडित राजेश्वर शास्त्री द्राविड़ को पहले ही पद्मभूषण से सम्मानित किया जा चुका है। उनके गुरु पट्टाभिराम शास्त्री भी पद्मभूषण से अलंकृत थे। इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए पंडित द्राविड़ ने अपने कर्म और ज्ञान से न केवल काशी, बल्कि पूरे भारत में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई।

तपस्वी जीवन और सम्मान:

पंडित गणेश्वर शास्त्री अपने सादगी भरे जीवन के लिए भी जाने जाते हैं। वे ऋषि परंपरा का पालन करते हुए केवल धोती पहनते हैं और जूता-चप्पल का त्याग किया हुआ है। उन्हें तर्कवागीश, राष्ट्रीय पंडित पुरस्कार, धर्मसंस्कृति महाकुंभ, माणिक्यगौरवम, और ज्योतिषविद्यारत्नम जैसे कई सम्मान मिल चुके हैं।

पद्मश्री मिलने पर कहा...

पद्मश्री सम्मान मिलने पर उन्होंने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा, "यह भगवान की कृपा है। मैंने जीवन में कभी सम्मान के लिए काम नहीं किया, बल्कि अपने कर्म पर विश्वास रखा। यह सम्मान मेरे गुरुओं, भगवान और मेरे संस्कारों का प्रतिफल है।" उन्होंने बाबा विश्वनाथ और अपने सभी गुरुओं को नमन करते हुए इस सम्मान को समाज और धर्म को समर्पित किया।

पंडित गणेश्वर शास्त्री द्राविड़ की इस उपलब्धि से न केवल काशी, बल्कि पूरे देश में हर्ष का माहौल है। उनके तपस्वी जीवन और धर्म के प्रति उनकी निष्ठा युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।