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सेना के ऑपरेशन का...पहलगाम हमले के बाद सरकार ने मीडिया के लिए जारी की एडवाइजरी, दिए ये बड़े निर्देश

Indian Army

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम (Pahalgam Terror Attack) में हुए आतंकी हमले के बाद, जिसमें 28 लोगों की जान गई थी, सरकार ने मीडिया संस्थानों और सोशल मीडिया यूजर्स को सेना की गतिविधियों का लाइव प्रसारण न करने की सख्त हिदायत दी है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि सेना और सुरक्षा बलों के मूवमेंट या ऑपरेशन की रियल टाइम रिपोर्टिंग से अनजाने में दुश्मन को फायदा पहुंच सकता है और इससे सैनिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। मंत्रालय ने चेताया कि केबल टीवी नेटवर्क संशोधन एक्ट 2021 के नियमों का उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई होगी।

मीडिया के लिए एडवाइजरी की मुख्य बातें:

  • राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी मीडिया चैनल, डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया यूजर्स को निर्देश दिया गया है कि वे सैन्य अभियानों की रिपोर्टिंग करते समय सावधानी बरतें।

  • सेना के ऑपरेशन और मूवमेंट का लाइव कवरेज और रियल टाइम विजुअल दिखाने से बचें।

  • संवेदनशील जानकारियों का जल्दबाजी में खुलासा करने से ऑपरेशन की सफलता प्रभावित हो सकती है और सुरक्षा बलों की जान को खतरा हो सकता है।

  • मीडिया और आम नागरिकों की भी यह नैतिक जिम्मेदारी है कि राष्ट्रीय हितों का ध्यान रखते हुए रिपोर्टिंग करें।

  • पहले भी सरकार ने निर्देश जारी किए थे कि आतंकवाद विरोधी अभियानों का लाइव प्रसारण नहीं किया जाएगा। ऑपरेशन पूरा होने के बाद अधिकृत अधिकारी ही जानकारी साझा करेगा।

पुराने उदाहरणों का हवाला:

सरकार ने कंधार अपहरण, कारगिल युद्ध और 26/11 मुंबई आतंकी हमले के उदाहरण देते हुए कहा कि इन घटनाओं में मीडिया की अनियंत्रित रिपोर्टिंग ने राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुँचाया था। कारगिल युद्ध में सेना की मूवमेंट दिखाए जाने से पाकिस्तानी सेना को हमारी रणनीति का पता चल गया था। वहीं कंधार हाईजैक के दौरान यात्रियों के परिवारों की भावनात्मक अपीलों के लाइव टेलीकास्ट ने सरकार पर दबाव बनाया, जिससे आतंकियों की रिहाई करनी पड़ी थी।

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रेलवे ने भी गैर-कश्मीरियों के लिए जारी की चेतावनी:

भारतीय रेलवे ने जम्मू-कश्मीर में तैनात गैर-कश्मीरी कर्मचारियों के लिए एडवाइजरी जारी की है। इसमें कहा गया है कि वे अकेले बाहर न जाएं और आने-जाने के दौरान रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की सुरक्षा का इस्तेमाल करें। खुफिया एजेंसियों के इनपुट के अनुसार, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और उसके सहयोगी आतंकी संगठन गैर-कश्मीरियों, पुलिस कर्मियों और कश्मीरी पंडितों को निशाना बना सकते हैं, विशेषकर श्रीनगर और गंदरबल इलाकों में।