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हार के बाद टीएमसी में फूट के संकेत? ममता बनर्जी की मीटिंग में नहीं पहुंचे कई विधायक​​​​​​​

Mamata

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर हलचल तेज होती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री और पार्टी प्रमुख Mamata Banerjee द्वारा बुलाई गई अहम रणनीति बैठक में कई नए विधायक शामिल नहीं हुए, जिसके बाद पार्टी के अंदर मतभेद और संभावित फूट की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, टीएमसी के करीब 80 नए चुने गए विधायकों में से लगभग 70 विधायक ही बैठक में पहुंचे। करीब 9 से 10 विधायकों की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए। यह बैठक चुनावी हार के बाद पार्टी की नई रणनीति तय करने और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के चयन को लेकर बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही थी।

बैठक में कई विधायकों के नहीं पहुंचने के बाद विपक्ष और राजनीतिक विश्लेषकों ने दावा करना शुरू कर दिया कि टीएमसी के भीतर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। भाजपा के हाथों सत्ता गंवाने के बाद पार्टी में असंतोष और गुटबाजी बढ़ने की अटकलें भी लगाई जाने लगीं। हालांकि, टीएमसी ने इन तमाम दावों को सिरे से खारिज कर दिया।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, जो विधायक बैठक में शामिल नहीं हुए थे, उन्होंने पहले ही पार्टी नेतृत्व को इसकी जानकारी दे दी थी। कुछ विधायकों को पार्टी की ओर से बैठक में शामिल न होने के निर्देश भी दिए गए थे। टीएमसी ने कहा कि मीडिया में गैरमौजूद विधायकों को लेकर बेवजह अफवाहें फैलाई जा रही हैं और इसे किसी अंदरूनी विवाद से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

पार्टी की ओर से यह भी बताया गया कि उत्तर बंगाल के कुछ विधायकों को संगठनात्मक कारणों से बैठक में न आने के लिए कहा गया था। वहीं, सागरदीघी के विधायक पारिवारिक मेडिकल इमरजेंसी के कारण बैठक में शामिल नहीं हो सके। इसके अलावा बीरभूम के विधायक काजल एसके को जिले में रुककर चुनाव बाद हिंसा से प्रभावित परिवारों की मदद करने की जिम्मेदारी दी गई थी।

बुधवार शाम को Kolkata स्थित ममता बनर्जी के आवास पर हुई इस बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेता और नए विधायक मौजूद रहे। बैठक में टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव Abhishek Banerjee भी शामिल हुए।

बैठक के बाद टीएमसी प्रवक्ता और बेलियाघाटा से विधायक Kunal Ghosh ने कहा कि पार्टी में भविष्य की सभी जिम्मेदारियों का फैसला केवल ममता बनर्जी करेंगी। उन्होंने कहा कि किसे कौन-सी जिम्मेदारी दी जाएगी, यह पूरी तरह “दीदी” का फैसला होगा और सभी नेता उनके निर्णय का पालन करेंगे।

कुणाल घोष ने चुनाव नतीजों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की जीत पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से नहीं हुई और चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है। वहीं, अब टीएमसी हार के बाद संगठन को फिर से मजबूत करने और नई राजनीतिक रणनीति तैयार करने में जुट गई है।