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IIT कानपुर में पीएचडी छात्र ने की आत्महत्या: क्या अकेलापन बना कारण?

IIT कानपुर में पीएचडी छात्र ने की आत्महत्या: क्या अकेलापन बना कारण?

कानपुर: आईआईटी कानपुर में पीएचडी के छात्र अंकित यादव (24) ने अपने हॉस्टल के कमरे में आत्महत्या कर ली। वह केमिस्ट्री में पीएचडी कर रहे थे और छह महीने पहले ही दाखिला लिया था। घटना के बाद संस्थान में शोक की लहर है। अंकित के कमरे से तीन पेज का सुसाइड नोट मिला है, लेकिन उसमें आत्महत्या की स्पष्ट वजह नहीं लिखी गई। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

आखिरी बार रात में देखा गया था टहलते हुए

रविवार रात करीब 10:30 बजे अंकित को आखिरी बार टहलते हुए देखा गया था। उसके बाद वह अपने कमरे में चला गया। सोमवार को जब साथी छात्रों ने उसे नहीं देखा तो उन्होंने दरवाजा खटखटाया। जब कोई जवाब नहीं मिला, तो खिड़की से झांककर देखा, जहां अंकित का शव पंखे से लटकता मिला।

मेधावी छात्र था अंकित

नोएडा के सेक्टर 71 के रहने वाले अंकित शुरू से ही मेधावी थे। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीएससी और आईआईटी दिल्ली से एमएससी की थी। उन्हें यूजीसी की फेलोशिप मिली थी, जिसके तहत दो साल तक 37,000 रुपये और अगले तीन साल तक 41,000 रुपये मासिक मिलते।

क्या पढ़ाई का दबाव वजह थी?

आईआईटी कानपुर के डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स प्रो. प्रतीक सेन ने बताया कि पीएचडी की पढ़ाई का असली दबाव तीन साल बाद शुरू होता है। अंकित ने नवंबर में कोर्स वर्क पूरा किया था और जनवरी में पहला सेमेस्टर शुरू हुआ था। ऐसे में पढ़ाई का तनाव कोई कारण नहीं हो सकता।

अकेलेपन की वजह से तो नहीं उठाया यह कदम?

संस्थान में अक्सर छात्रों को डबल रूम देने की चर्चा होती है, ताकि वे अकेलापन महसूस न करें। लेकिन छात्र ही निजता का हवाला देकर सिंगल रूम पसंद करते हैं। प्रोफेसरों के मुताबिक, अंकित ने कभी काउंसलिंग नहीं ली और न ही उसके डिप्रेशन में होने की कोई जानकारी थी।

आईआईटी में बढ़ते आत्महत्या के मामले

अंकित की आत्महत्या पहली घटना नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में आईआईटी में आत्महत्या की घटनाएं बढ़ी हैं:

10 अक्टूबर 2024 – पीएचडी छात्रा प्रगति ने आत्महत्या की।

11 जनवरी 2024 – एमटेक छात्र विकास मीणा ने फंदा लगाया।

18 जनवरी 2024 – पीएचडी छात्रा प्रियंका जायसवाल ने जान दी।

19 दिसंबर 2023 – शोध सहायक पल्लवी चिल्का ने आत्महत्या की।

7 सितंबर 2022 – पीएचडी छात्र प्रशांत सिंह ने आत्महत्या की।

क्या कहती है पुलिस?

डीसीपी पश्चिम राजेश कुमार सिंह ने बताया कि सुसाइड नोट में कोई खास कारण नहीं लिखा गया है। पुलिस अंकित के मोबाइल और लैपटॉप की जांच कर रही है। साथ ही, परिवार से बातचीत कर आत्महत्या के पीछे की वजह का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।

जरूरत है मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने की

आईआईटी जैसे संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर खुलकर बातचीत कम होती है। हालांकि, प्रशासन मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराता है, लेकिन छात्र काउंसलिंग लेने से बचते हैं। इस घटना के बाद संस्थान प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या छात्रों की मानसिक सेहत पर पर्याप्त ध्यान दिया जा रहा है।

अंकित की आत्महत्या कई सवाल छोड़ गई है। क्या आईआईटी जैसे संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य पर और ध्यान देने की जरूरत है? क्या अकेलापन और सामाजिक दबाव इस तरह की घटनाओं के पीछे बड़ी वजह बन रहे हैं? इन सवालों के जवाब ढूंढना जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।