Women's Day 2025 : बचपन में आंखों की रोशनी खोने वाली प्रांजल पाटिल बनी IAS, अब बिना आंखों के समाज को दे रहीं नयी धारा, जानिए कैसे किया UPSC क्रैक

IAS Pranjal Patil Story: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है। इसे पास करने के लिए कड़ी मेहनत, लगन, धैर्य और अटूट संकल्प की जरूरत होती है। आज महिला दिवस (Women's Day 2025) के अवसर पर हम आपको एक ऐसी महिला ऑफिसर की स्टोरी बताने जा रहे है, जो हर किसी को जीवन में प्रेरित करेगी। जो अपने दृढ़ संकल्प और मेहनत के बदौलत देश की पहली दृष्टिहीन महिला IAS ऑफिसर बनी।
संघर्षों को पार कर बनीं IAS अधिकारी
प्रांजल पाटिल (IAS Pranjal Patil Story) ने अपनी मेहनत और संकल्प से हर चुनौती को पार किया और UPSC परीक्षा में सफलता हासिल की। उन्होंने 2016 में पहली बार सिविल सेवा परीक्षा दी थी, जिसमें उनकी रैंक 744 आई। हालांकि, इससे संतुष्ट न होकर उन्होंने 2017 में दोबारा परीक्षा दी और इस बार ऑल इंडिया 124वीं रैंक प्राप्त की।
बिना कोचिंग के ऐसे की UPSC की तैयारी
सबसे खास बात यह थी कि प्रांजल ने UPSC की तैयारी के लिए कोई कोचिंग नहीं ली। उन्होंने एक स्पेशल सॉफ्टवेयर की मदद से पढ़ाई की, जो किताबों को ज़ोर से पढ़कर सुनाता था। अपनी आंखों की रोशनी न होने के बावजूद उन्होंने अपनी सुनने की क्षमता को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया और परीक्षा में सफलता हासिल की।
कौन हैं प्रांजल पाटिल?
प्रांजल पाटिल का जन्म महाराष्ट्र के उल्हासनगर में हुआ था। दुर्भाग्यवश, उन्होंने बचपन में ही अपनी आंखों की रोशनी खो दी थी, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।
शिक्षा और करियर:
- स्कूली शिक्षा – कमला मेहता दादर स्कूल फॉर द ब्लाइंड, मुंबई
- ग्रेजुएशन – सेंट जेवियर्स कॉलेज, मुंबई (राजनीति विज्ञान)
- पोस्ट ग्रेजुएशन – जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), दिल्ली (अंतरराष्ट्रीय संबंध)
- एम.फिल और पीएचडी – JNU, दिल्ली
पहली पोस्टिंग और वर्तमान कार्यभार
2017 में UPSC परीक्षा में 124वीं रैंक हासिल करने के बाद, 2018 में उन्हें केरल के एर्नाकुलम में सहायक कलेक्टर के पद पर नियुक्त किया गया। वर्तमान में, प्रांजल पाटिल तिरुवनंतपुरम की सब-कलेक्टर के रूप में कार्यरत हैं और उन्हें केरल का कार्यभार सौंपा गया है।
प्रेरणा की मिसाल
प्रांजल पाटिल की कहानी साबित करती है कि सच्ची मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति के आगे कोई भी बाधा टिक नहीं सकती। उनका सफर न सिर्फ UPSC की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सपनों को साकार करना चाहता है।
.webp)
