दिल्ली में मुख्यमंत्री पद पर सस्पेंस बरकार : चर्चित नामों के बीच संघ की हुई एंट्री, इन पर खेल सकती है बीजेपी दांव

नई दिल्ली: दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सत्ता में वापसी के बाद अब मुख्यमंत्री और मंत्री पद को लेकर हलचल तेज़ हो गई है। भाजपा के कई वरिष्ठ नेता और विधायक आलाकमान से नज़दीकी बढ़ाने में जुट गए हैं। वहीं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े विधायकों ने भी संघ के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकातें तेज़ कर दी हैं। अब सभी की नज़र इस पर टिकी है कि पार्टी किसे मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपेगी।
मुख्यमंत्री की रेस में कौन-कौन?
भाजपा के अंदर मुख्यमंत्री पद के लिए कई नाम चर्चा में हैं। नई दिल्ली विधानसभा सीट से अरविंद केजरीवाल को हराने वाले प्रवेश वर्मा को सबसे मज़बूत दावेदार माना जा रहा है। वहीं, सांसद और पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी भी मुख्यमंत्री पद की रेस में शामिल हैं। पूर्वांचली मतदाताओं को साधने के लिए भाजपा उन्हें यह ज़िम्मेदारी दे सकती है।
इसके अलावा मनजिंदर सिंह सिरसा, जो पहले शिरोमणि अकाली दल (SAD) में थे और अब भाजपा में शामिल हो चुके हैं, भी एक महत्वपूर्ण दावेदार माने जा रहे हैं। पार्टी यदि सिख समुदाय को साधने की रणनीति अपनाती है, तो सिरसा को मुख्यमंत्री पद की ज़िम्मेदारी मिल सकती है।
अन्य दावेदारों का समीकरण
विधानसभा में भाजपा के नेता प्रतिपक्ष रहे विजेंद्र गुप्ता लगातार तीसरी बार विधायक चुने गए हैं और पंजाबी समुदाय से आते हैं। इसके अलावा, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा, जनकपुरी से विधायक आशीष सूद भी इस दौड़ में शामिल हैं।
मुख्यमंत्री पद के अलावा, मंत्री पद की दौड़ में अजय महावर, मोहन सिंह बिष्ट, अभय वर्मा, ओपी शर्मा जैसे नाम प्रमुख हैं। वहीं, महिला विधायकों में रेखा गुप्ता और सिख नेता तरविंदर सिंह मारवाह भी मंत्री पद के दावेदार हो सकते हैं।
क्या होगा दिल्ली भाजपा का अगला कदम?
भाजपा के रणनीतिकार अब इस बात पर विचार कर रहे हैं कि दिल्ली में किस समुदाय से मुख्यमंत्री बनाया जाए ताकि आगामी चुनावों में पार्टी को अधिक लाभ मिल सके। जाट समुदाय, पूर्वांचली वोट बैंक और पंजाबी-सिख समुदाय के बीच संतुलन बनाना भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।
अब देखना यह है कि भाजपा आलाकमान किस नाम पर मुहर लगाता है और दिल्ली को नया मुख्यमंत्री कौन मिलता है।
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