ब्राह्मण-OBC-दलित समीकरण साधने की तैयारी! इन 6 नए चेहरों की एंट्री तय, जो योगी कैबिनेट में बन सकते हैं मंत्री

सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) रविवार को अपने मंत्रिमंडल का विस्तार कर सकते हैं। बताया जा रहा है कि इस विस्तार में करीब छह नए चेहरों को योगी कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है। इसके साथ ही कई मौजूदा मंत्रियों के विभागों में भी फेरबदल होने की संभावना जताई जा रही है।
इन नेताओं के नाम सबसे आगे
मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर जिन नेताओं के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं, उनमें मनोज पाण्डेय, पूजा पाल, भूपेंद्र सिंह चौधरी, अशोक कटारिया और रोम सहानी के नाम प्रमुख हैं।
बताया जा रहा है कि भाजपा इस विस्तार के जरिए अलग-अलग सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की रणनीति पर काम कर रही है।
सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश
सूत्रों के अनुसार, मनोज पाण्डेय को ब्राह्मण चेहरे के तौर पर देखा जा रहा है। वे समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। वहीं Pooja Pal महिला और ओबीसी वर्ग का प्रतिनिधित्व करती हैं, इसलिए उन्हें भी कैबिनेट में जगह मिलने की चर्चा तेज है।
दलित समुदाय को साधने के लिए कृष्णा पासवान का नाम सामने आ रहा है, जबकि पश्चिमी यूपी और जाट वोट बैंक को ध्यान में रखते हुए Bhupendra Singh Chaudhary को अहम जिम्मेदारी मिल सकती है।
लखीमपुर क्षेत्र में मजबूत पकड़ रखने वाले Rom Sahani और संगठन कोटे से Ashok Kataria को भी जगह मिलने की संभावना जताई जा रही है।
मिशन 2027 की रणनीति पर फोकस
भाजपा अगले विधानसभा चुनाव से पहले उन समुदायों को साधना चाहती है, जो खुद को प्रतिनिधित्व से वंचित महसूस कर रहे हैं। पार्टी का फोकस ब्राह्मण, ओबीसी और दलित वोट बैंक के बीच संतुलन बनाने पर है।
सूत्रों का कहना है कि इस बार 65 साल से अधिक उम्र के नेताओं को कम प्राथमिकता दी जा सकती है। भाजपा युवा और ऊर्जावान चेहरों को आगे लाकर ‘प्रो-इंकम्बेंसी’ का माहौल तैयार करना चाहती है।
तीसरे डिप्टी CM की भी चर्चा
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि योगी सरकार में एक और डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो उत्तर प्रदेश में डिप्टी सीएम की संख्या बढ़कर तीन हो जाएगी।
फिलहाल योगी सरकार में कुल 54 मंत्री हैं, जबकि संवैधानिक रूप से मंत्रियों की अधिकतम संख्या 60 तक हो सकती है। ऐसे में माना जा रहा है कि यह कैबिनेट विस्तार आने वाले चुनावों से पहले भाजपा की बड़ी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है।
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