बंगाल में आज किसकी बनेगी सरकार? 34 साल लेफ्ट, 14 साल ममता, अब जनता करेगी फैसला

कांग्रेस से लेफ्ट तक: शुरुआती सियासत
आजादी के बाद लंबे समय तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का पश्चिम बंगाल की राजनीति पर दबदबा रहा। 1952 से लेकर 1977 तक कांग्रेस ने कई बार सरकार बनाई, हालांकि इस दौरान राजनीतिक अस्थिरता भी देखने को मिली।
1977: जब शुरू हुआ 34 साल का लेफ्ट राज
साल 1977 में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के नेतृत्व में वाम मोर्चा सत्ता में आया और इतिहास रच दिया। ज्योति बसु और बाद में बुद्धदेव भट्टाचार्य के नेतृत्व में लेफ्ट फ्रंट ने लगातार 34 वर्षों तक शासन किया, जो भारत के किसी भी राज्य में सबसे लंबा लोकतांत्रिक शासन माना जाता है।
2011: ममता बनर्जी का उभार
2011 में बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव आया, जब तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने लेफ्ट के मजबूत किले को ध्वस्त कर सत्ता हासिल की। तब से लेकर अब तक वे लगातार राज्य की सत्ता में बनी हुई हैं।
BJP की चुनौती से बदला समीकरण
पिछले कुछ वर्षों में भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल में अपनी पकड़ मजबूत की है। पार्टी अब मुख्य विपक्ष के रूप में उभरी है, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय और दिलचस्प हो गया है।
क्यों अहम है आज का दिन?
आज आने वाले नतीजे सिर्फ सरकार नहीं तय करेंगे, बल्कि यह भी तय करेंगे कि बंगाल की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी।
सबसे बड़ा सवाल यही है, क्या ममता बनर्जी का दबदबा कायम रहेगा? या बंगाल में सत्ता परिवर्तन का नया अध्याय शुरू होगा?
अब पूरा देश पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों पर नजरें टिकाए हुए है, जहां जनता का फैसला आने वाली राजनीति की दिशा तय करेगा।
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