Meta का बड़ा एलान : समुद्र के अंदर बिछाएगा 50,000 किलोमीटर लंबा केबल नेटवर्क, भारत को होगा बड़ा फायदा

सोशल मीडिया दिग्गज मेटा (Meta), जो फेसबुक और इंस्टाग्राम की मालिक है, ने भारत को अपने महत्वाकांक्षी अंडरवाटर केबल प्रोजेक्ट "प्रोजेक्ट वाटरवर्थ" में शामिल करने की घोषणा की है। इस परियोजना का उद्देश्य समुद्र के नीचे से 50,000 किलोमीटर से अधिक लंबा इंटरनेट केबल नेटवर्क बिछाना है, जो दुनिया के पांच महाद्वीपों को जोड़ते हुए डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत बनाएगा।
क्या है प्रोजेक्ट वाटरवर्थ?
मेटा का यह मल्टी-बिलियन डॉलर प्रोजेक्ट दुनिया भर में डिजिटल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। कंपनी इस प्रोजेक्ट के जरिए भारत, अमेरिका और अन्य महाद्वीपों के बीच इंटरनेट ट्रैफिक को सुचारू और तेज़ बनाने की योजना बना रही है। समुद्र के नीचे बिछाई जाने वाली यह केबल पृथ्वी के सरकम्फ्रेंस से भी लंबी होगी। मेटा के मुताबिक, यह परियोजना उनकी 18वीं अंडरवाटर केबल परियोजना है, जिसमें भारत प्रमुख केंद्र होगा।
भारत को क्या होगा फायदा?
मेटा ने कहा है कि भारत की बढ़ती डिजिटल मांग को पूरा करने के लिए यह निवेश किया जा रहा है। इस परियोजना से भारतीय उपभोक्ताओं को तेज़ इंटरनेट, बेहतर नेटवर्क कनेक्टिविटी और कम डेटा लागत का लाभ मिलेगा। इसके अलावा, यह प्रोजेक्ट डिजिटल समावेशन को बढ़ावा देगा और भारत के तकनीकी क्षेत्र में नए इनोवेशन लाने में मदद करेगा।
मेटा के प्रवक्ता ने कहा, "हम अपने सबसे बड़े बाजारों में से एक भारत में निवेश कर रहे हैं। यह भारत को डिजिटल रूप से समर्थ बनाने और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।"
कैसे काम करते हैं अंडरवाटर केबल?अंडरवाटर केबल्स इंटरनेट के लिए रीढ़ की हड्डी की तरह काम करते हैं। ये केबल देशों और महाद्वीपों को आपस में जोड़ते हैं। लोकल टेलीकॉम ऑपरेटर्स इन केबल्स से जुड़कर अपने ग्राहकों को इंटरनेट सेवाएं प्रदान करते हैं। यह प्रोजेक्ट डेटा ट्रैफिक लोड को कम करने और ग्राहकों को तेज़ व सुचारू इंटरनेट सेवा देने के लिए एक बड़ा कदम है।
डिजिटल युग में भारत को मिलेगी नई उड़ान
यह प्रोजेक्ट भारत में डिजिटल अर्थव्यवस्था को एक नई गति प्रदान करेगा। देश में स्टार्टअप्स, टेलीकॉम ऑपरेटर्स और टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन के लिए यह एक बड़ा अवसर साबित होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान मेटा ने इस अहम परियोजना की घोषणा की है, जिससे भारत के डिजिटल भविष्य के लिए एक नई राह खुलेगी।
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