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UGC के नए नियमों पर बढ़ते विवाद के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बयान, बोले- भेदभाव किसी...

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नई दिल्ली। यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) द्वारा जारी किए गए ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम, 2026’ को लेकर देशभर में विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। खासकर सामान्य वर्ग के छात्र और संगठन इन नियमों के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान समेत कई राज्यों में धरना-प्रदर्शन और मशाल जुलूस देखने को मिल रहे हैं।

विरोध कर रहे संगठनों का आरोप है कि नए नियम सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ एकतरफा हैं और इनके जरिए झूठी शिकायतों का सहारा लेकर उन्हें परेशान किया जा सकता है। इसी मुद्दे पर अब केंद्र सरकार ने पहली बार खुलकर प्रतिक्रिया दी है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मीडिया से बातचीत में छात्रों और अभ्यर्थियों को आश्वासन दिया कि नए नियमों का दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा और किसी भी वर्ग के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा, मैं बेहद विनम्रता से यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि किसी के साथ उत्पीड़न या भेदभाव नहीं होगा। डिस्क्रिमिनेशन के नाम पर कानून का गलत इस्तेमाल किसी को करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। चाहे यूजीसी हो, केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार सभी की जिम्मेदारी है कि संविधान की सीमा में रहकर काम करें। मैं भरोसा दिलाता हूं कि किसी तरह का अत्याचार या भेदभाव नहीं होगा। यह पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में है।”

दरअसल, ये नियम उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के उद्देश्य से लाए गए हैं। इसमें एससी, एसटी के साथ-साथ ओबीसी वर्ग को भी शामिल किया गया है। नियमों के तहत हर विश्वविद्यालय और कॉलेज में इक्वल ऑपर्च्युनिटी सेल और इक्विटी कमेटी का गठन अनिवार्य किया गया है।

हालांकि, विरोध कर रहे छात्रों और संगठनों का कहना है कि यह व्यवस्था सामान्य वर्ग के खिलाफ जा सकती है, इसलिए वे इन नियमों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।

शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, फैली हुई भ्रांतियों को दूर करने के लिए जल्द ही सरकार की ओर से एक विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया जा सकता है। फिलहाल, देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन जारी हैं और यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है, जहां नियमों के खिलाफ याचिका भी दायर की गई है।