मथुरा मस्जिद समिति ने केंद्र पर लगाए आरोप, SC से जवाबी अधिकार समाप्त करने की मांग

मथुरा की शाही मस्जिद समिति ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर उपासना स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 को चुनौती देने वाली याचिकाओं में केंद्र सरकार के जवाब दाखिल करने के अधिकार को खत्म करने की मांग की है। समिति ने केंद्र पर आरोप लगाया है कि वह जानबूझकर इस मामले में देरी कर रहा है।
केंद्र पर जानबूझकर देरी का आरोप
समिति का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2021 में केंद्र को नोटिस जारी किया था, लेकिन केंद्र ने अब तक जवाब दाखिल नहीं किया है। सुप्रीम कोर्ट ने 12 दिसंबर, 2024 को केंद्र को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया था, लेकिन यह अवधि समाप्त हो चुकी है।
17 फरवरी को होगी सुनवाई
शाही मस्जिद समिति ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के लिए 17 फरवरी, 2025 की तिथि निर्धारित की है। ऐसे में केंद्र के जवाब दाखिल करने के अधिकार को समाप्त करना न्याय के हित में होगा, ताकि संबंधित पक्ष अपनी दलीलें प्रस्तुत कर सकें।
1991 के कानून पर विवाद
उपासना स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 को लेकर कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय और अन्य याचिकाकर्ताओं ने इस कानून के प्रावधानों को चुनौती दी है। इस कानून का उद्देश्य धार्मिक स्थलों की स्थिति को 15 अगस्त, 1947 के आधार पर बनाए रखना है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिए निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने 12 दिसंबर, 2024 को सभी अदालतों को निर्देश दिया था कि वे 1991 के कानून के तहत धार्मिक स्थलों को लेकर नए मुकदमों पर विचार न करें और लंबित मामलों में कोई अंतरिम या अंतिम आदेश न पारित करें।
इस मुद्दे पर 17 फरवरी को होने वाली सुनवाई से केंद्र और याचिकाकर्ताओं के रुख पर बड़ी स्पष्टता आने की उम्मीद है।
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