नगर निगम का बड़ा फैसला : अब वाराणसी में नहीं बिकेंगी मांस- मछली, शहर से बाहर शिफ्ट होंगी नॉनवेज की दुकानें

वाराणसी। धर्म और आध्यात्मिकता की नगरी काशी में मांस और मछली की दुकानों को लेकर नगर निगम ने बड़ा फैसला लिया है। नगर निगम प्रशासन ने शहर के भीतर चल रही मांस और मछली की दुकानों को चरणबद्ध तरीके से शहर के बाहरी क्षेत्रों में स्थानांतरित करने की योजना बनाई है। इस फैसले को धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नगर निगम के अनुसार काशी विश्वनाथ धाम, प्रमुख मंदिरों, घाटों और तीर्थ क्षेत्रों में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में शहर की स्वच्छता, यातायात व्यवस्था और धार्मिक वातावरण को बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। प्रशासन का कहना है कि मांस और मछली की दुकानों को बंद नहीं किया जा रहा है, बल्कि उन्हें निर्धारित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाएगा ताकि व्यापार भी चलता रहे और शहर की धार्मिक पहचान भी सुरक्षित रहे।
सूत्रों के अनुसार पहले चरण में पांच स्थानों का चयन किया गया है, जहां इन दुकानों को व्यवस्थित तरीके से स्थानांतरित किया जाएगा। नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि किसी भी दुकानदार को अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किया जाएगा और उनके व्यवसाय को प्रभावित होने से बचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी।
महापौर और नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि काशी विश्वनाथ धाम के विस्तार और धार्मिक पर्यटन के बढ़ते महत्व को देखते हुए शहर की छवि को और बेहतर बनाने की आवश्यकता है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु और पर्यटक काशी आते हैं। ऐसे में शहर के प्रमुख धार्मिक मार्गों और पर्यटन स्थलों के आसपास मांस-मछली की दुकानों को हटाने की मांग लंबे समय से उठती रही है।
इस फैसले को लेकर शहर में मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने इसका स्वागत करते हुए कहा है कि इससे काशी की धार्मिक गरिमा और स्वच्छता को बढ़ावा मिलेगा। वहीं कुछ व्यापारियों और मुस्लिम धर्मगुरुओं ने आशंका जताई है कि दुकानों को शहर से बाहर ले जाने से व्यापार प्रभावित हो सकता है और नॉनवेज खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी भी हो सकती है।
मुस्लिम धर्मगुरुओं के एक वर्ग ने इस निर्णय का समर्थन करते हुए यह भी कहा है कि यदि धार्मिक स्थलों की गरिमा बनाए रखने के लिए मांस-मछली की दुकानों को हटाया जा रहा है तो शराब की दुकानों को भी धार्मिक क्षेत्रों से दूर किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि यह व्यवस्था सभी प्रकार के व्यवसायों पर समान रूप से लागू होनी चाहिए।
प्रशासन की योजना के अनुसार अगले छह महीनों के भीतर इस प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। नगर निगम संबंधित विभागों के साथ मिलकर नई जगहों पर आधारभूत सुविधाएं विकसित करेगा ताकि व्यापारियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
गौरतलब है कि वाराणसी में इससे पहले भी विभिन्न धार्मिक अवसरों पर मांस और नॉनवेज खाद्य पदार्थों की बिक्री पर अस्थायी प्रतिबंध लगाए जाते रहे हैं। नगर निगम समय-समय पर धार्मिक आयोजनों और विशेष पर्वों के दौरान मांस की दुकानों को बंद रखने के आदेश जारी करता रहा है।
फिलहाल नगर निगम के इस फैसले ने पूरे शहर में चर्चा छेड़ दी है। समर्थकों का मानना है कि इससे काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूती मिलेगी, जबकि विरोध करने वाले पक्ष का कहना है कि निर्णय लागू करते समय व्यापारियों के हितों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। आने वाले महीनों में इस योजना के क्रियान्वयन पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
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