राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: ट्रस्ट महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा ने दिया इस्तीफा, बोले CM योगी-किसी को नहीं...

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में एसआईटी की जांच के बाद दर्ज हुई पहली एफआईआर के बाद घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है। मामले में अब राम मंदिर तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। बताया जा रहा है कि चढ़ावे में अनियमितताओं के आरोपों और बढ़ते दबाव के बीच दोनों ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए यह फैसला लिया।
8 आरोपी कोर्ट में होंगे पेश
एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर दर्ज मुकदमे में पुलिस ने आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपियों को मंगलवार दोपहर बाद ड्यूटी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाएगा। मुहर्रम की छुट्टी होने के कारण नियमित अदालत की जगह ड्यूटी मजिस्ट्रेट मामले की सुनवाई करेंगे।
सीएम योगी बोले- किसी को नहीं मिलेगी छूट
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आरोप सामने आते ही सरकार ने एसआईटी गठित कर निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए थे। रिपोर्ट मिलते ही तत्काल मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनआस्था के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि अयोध्या करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और इस प्रकार की घटनाएं किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं।
कैसे सामने आया मामला?
जानकारी के अनुसार, मई महीने के अंतिम सप्ताह में ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने बैंक में जमा हो रही चढ़ावे की राशि का मिलान किया तो नकदी में लगातार कमी दिखाई दी। दानपेटियों से निकलने वाली रकम में गड़बड़ी का संदेह होने पर नोट गिनने वाले कक्ष में गुप्त कैमरे लगाए गए।
एक सप्ताह की रिकॉर्डिंग में कथित तौर पर कुछ कर्मचारी नोटों की गड्डियों से नकदी निकालकर कपड़ों में छिपाते हुए दिखाई दिए। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ मामलों में गड्डियों में अतिरिक्त नोट रखकर बैंक के लिए वाउचर तैयार किए जाते थे और बाद में बैंक भेजने से पहले अतिरिक्त नोट निकाल लिए जाते थे।
जेवरात चोरी के भी आरोप
जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए सोने-चांदी के आभूषण भी कथित रूप से चोरी किए जा रहे थे। इनमें बालियां, झुमके, नथ, कंगन और अन्य आभूषण शामिल बताए गए हैं। पुलिस ने एक आरोपी के घर से करीब 10 लाख रुपये नकद बरामद करने का दावा भी किया है।
कर्मचारियों की नियुक्ति पर भी उठे सवाल
जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि नोट गिनने का कार्य करने वाले कई कर्मचारी सिफारिश के आधार पर नियुक्त किए गए थे। आरोप है कि ट्रस्ट से जुड़े कुछ कर्मचारियों और उनके परिचितों को इस कार्य में लगाया गया था। साथ ही ड्यूटी समाप्त होने के बाद कर्मचारियों की तलाशी न लेने जैसी लापरवाही भी सामने आई, जिससे कथित तौर पर लंबे समय तक चोरी होती रही।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है। एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर आगे और भी कार्रवाई होने की संभावना जताई जा रही है।
.webp)
