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GDP के 7.8% आंकड़ों पर सपा सांसद अवधेश प्रसाद का सवाल, बोले-रिपोर्ट गलत’, अर्थव्यवस्था लड़खड़ा रही...

awdesh

वैश्विक स्तर पर आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत की पहली तिमाही की GDP ग्रोथ 7.8 फीसदी रहने के आंकड़ों को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। जहां केंद्र सरकार और बीजेपी इसे भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और विकास की रफ्तार का संकेत बता रहे हैं, वहीं समाजवादी पार्टी के लोकसभा सांसद अवधेश प्रसाद ने इन आंकड़ों पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने दावा किया कि GDP के ये आंकड़े जमीनी हकीकत से अलग हैं और देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति उतनी मजबूत नहीं है, जितनी तस्वीर पेश की जा रही है।

सपा सांसद ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था इस समय लड़खड़ाई हुई है। उनके मुताबिक, GDP के आंकड़े आम लोगों की वास्तविक स्थिति को प्रतिबिंबित नहीं करते। उन्होंने विदेश नीति और आर्थिक नीतियों को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि देश की नीतियां अमेरिका के प्रभाव में हैं।

राम मंदिर के CEO चयन पर भी उठाए सवाल

अवधेश प्रसाद ने राम मंदिर के CEO के चयन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है और ऐसे मामले में पारदर्शिता के साथ निर्णय लिया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया में ट्रस्ट को पर्याप्त अधिकार नहीं दिए गए हैं।

सपा सांसद ने कहा कि उनकी पार्टी पहले भी इस मुद्दे पर अपनी बात रख चुकी है और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक समिति गठित करने की मांग की थी। उनके मुताबिक, इतने बड़े धार्मिक और सार्वजनिक महत्व के मुद्दे पर निर्णय व्यापक निगरानी और स्पष्ट प्रक्रिया के तहत होना चाहिए।

चयन प्रक्रिया अंतिम चरण में

राम मंदिर के CEO के चयन की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंचने की बात कही जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, शॉर्टलिस्ट किए गए तीन नाम ट्रस्ट के सामने रखे जाएंगे, जिसके बाद किसी एक नाम पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है।

अवधेश प्रसाद ने आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य कुछ लोगों को बचाना है। उन्होंने कहा कि समय आने पर देश में लोग इसके खिलाफ आवाज उठाएंगे और बीजेपी व उसके सहयोगी संगठनों को इसके राजनीतिक परिणामों का सामना करना पड़ेगा।

हालांकि, GDP के आंकड़ों और राम मंदिर CEO चयन को लेकर सांसद द्वारा लगाए गए आरोप उनके राजनीतिक बयान हैं। इन दावों को आधिकारिक तथ्यों और संबंधित संस्थाओं के पक्ष के साथ देखना जरूरी है।