BJP Vs SP : मिल्कीपुर उपचुनाव का ट्रेंड बढ़ा रहा BJP का प्रेशर, क्या चंद्रभान पासवान पर दांव से पलटेगा खेल?

Milkipur By Election : उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले की मिल्कीपुर विधानसभा सीट (Milkipur Assembly Seat) के उपचुनाव में बीजेपी ने चंद्रभान पासवान (Chandrabhan Paswan)को उम्मीदवार घोषित किया है, जिनका मुकाबला सपा के अजीत प्रसाद (Ajit Prasad) से होगा। इस चुनाव में सपा और बीजेपी के बीच सीधा टकराव देखने को मिलेगा। फैजाबाद लोकसभा सीट पर हार के बाद बीजेपी किसी भी हालत में मिल्कीपुर सीट नहीं गंवाना चाहती, लेकिन इस उपचुनाव का ट्रेंड पार्टी के लिए चिंता का कारण बनता दिखाई दे रहा है। अब देखना दिलचस्प होगा किबीजेपी का यह दांव कितना खरा उतरता है और चंद्रभान पासवान सियासी बाजी पलट पाते हैं या नहीं।
सपा ने अजीत प्रसाद को उतारा मैदान में
फैजाबाद लोकसभा क्षेत्र से सपा नेता अवधेश प्रसाद (Avdesh Prasad) के सांसद चुने जाने के बाद मिल्कीपुर सीट पर उपचुनाव हो रहा है। सपा ने इस सीट को बरकरार रखने के लिए अवधेश प्रसाद के बेटे अजीत प्रसाद को मैदान में उतारा है। वहीं, बीजेपी ने 2022 के प्रत्याशी बाबा गोरखनाथ की जगह चंद्रभान पासवान पर भरोसा जताया है।
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दोनों ही प्रत्याशी पासी समाज से हैं, जो इस मुकाबले को रोचक बनाता है। मिल्कीपुर उपचुनाव न केवल उत्तर प्रदेश, बल्कि देशभर के राजनीतिक पंडितों की नजरों में है। यहां की जीत-हार के सियासी मायने निकाले जाएंगे।
मिल्कीपुर सीट का इतिहास
1967 में अस्तित्व में आई मिल्कीपुर विधानसभा सीट 2008 के परिसीमन के बाद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुई। आजादी के बाद यह तीसरा उपचुनाव है। इससे पहले 1998 और 2004 में उपचुनाव हुए थे।
- 1998 उपचुनाव: सपा के रामचंद्र यादव ने बीजेपी के बृजभूषण मणि त्रिपाठी को हराया।
- 2004 उपचुनाव: सपा के रामचंद्र यादव ने बसपा के आनंद सेन यादव को मात दी।
2025 उपचुनाव: मुख्य मुद्दे और चुनौती
इस बार उपचुनाव में बीजेपी और सपा के बीच मुकाबला है। सपा ने अपने मजबूत गढ़ को बरकरार रखने की तैयारी की है, जबकि बीजेपी इसे प्रतिष्ठा की लड़ाई मान रही है।
सपा का प्रदर्शन
पिछले उपचुनावों में सपा विपक्ष में रहते हुए भी जीत दर्ज करती रही है।
- 1998: बीजेपी सत्ता में रहते हुए हार गई।
- 2004: सपा ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की।
बीजेपी की रणनीति
बीजेपी ने युवा चेहरा चंद्रभान पासवान पर दांव लगाया है। उनका मुकाबला न केवल सपा के अजीत प्रसाद से होगा, बल्कि बाहरी होने के आरोपों का सामना करना भी होगा।
मिल्कीपुर का सियासी समीकरण
मिल्कीपुर सीट पर लगभग 3.23 लाख मतदाता हैं, जिनमें से दलित, यादव और ब्राह्मण वोटर अहम भूमिका निभाते हैं।
- दलित वोटर: 1 लाख (60 हजार पासी)
- यादव वोटर: 65 हजार
- ब्राह्मण वोटर: 50 हजार
सपा यादव-मुस्लिम-पासी समीकरण पर भरोसा कर रही है, जबकि बीजेपी सवर्ण और दलित वोटरों को साधने की कोशिश में है।
उपचुनाव की रोचकता
मिल्कीपुर में सपा अब तक चार बार जीत चुकी है, जबकि बीजेपी केवल दो बार ही जीत पाई है।
- 2022 चुनाव: सपा के अवधेश प्रसाद ने 13,338 वोटों से जीत हासिल की।
- लोकसभा चुनाव 2024: सपा ने विधानसभा क्षेत्र में बढ़त बनाई, जिससे बीजेपी के लिए चुनौती बढ़ गई।
मिल्कीपुर उपचुनाव सपा और बीजेपी के लिए अहम साबित होगा। जहां सपा अपने गढ़ को बचाने की कोशिश में है, वहीं बीजेपी इसे प्रतिष्ठा की लड़ाई मान रही है। यह चुनाव न केवल स्थानीय राजनीति, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी सियासी संकेत देगा।
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